लेखनी/LEkhni-जुलाई-अगस्त 26

सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
Bridging The Gap

“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में ”
-वशीर बद्र

अंक-१६७ वर्ष २०

अपनी बातः युद्ध के विरुद्ध
इस अंक की कविताः ऋतु विशेषः लेखनी समकलनः फुहारें। माह विशेष लेखनी संकलनः विद्रोह के स्वर। अविस्मरणीय वशीर बद्रः गीत और ग़ज़ल। कविता आज और अभीः कुछ नहीं बीतता-महेश केसरी, बोकारो, झारखंड, शैल अग्रवाल,सुधांशु मिश्र, गौतम सचदेव, शैलजा सक्सेना। गीत और ग़ज़लः कमल किशोर राजपूत, माह की कवियत्रीः चंदा प्रहलादिका।
गद्य मेंः परिचयः हमारे प्राचीन ऋषि और उनकी ज्ञान परंपरा। मुद्दाः कैदी कौन- सुनील चौरसिया ‘सावन’।समसामयिकीः हिटलर के बाद- महेश कुमार, लखनऊ। कहानी धरोहरः दूसरी नाक-यशपाल। कहानी समकालीनः जाल -शैल अग्रवाल। कहानी समकालीनः तुम तक जाने की राह- पद्मा मिश्रा। कहानी समकालीनः सूर्यास्त के बाद-देवी नागरानी। आकलनः रेत-समाधि-शुभा श्रीवास्तव। हास्य-व्यंग्यः दस हजार का रायता-महेश केसरी। बाल कोना- छह कवित- रश्मि सिंह।

In The English Section: My Column: War is no solution. Lekhni Selection: Unforgettable War Poems:Marjorie Pickthall, Isack Rosenberg,John McCrae, Clifford Dyment, Philip Larkin. Favourite Forever:Nazik AL Malaika. Poetry Here & Now: Shail Agrawal.Story: Death Constant Beyond Love-Gabriel Garcia Marquez Kids’Corner: Story Toy box, Poem : Birdie On a Window Sill by Shail Agrawal.

परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल
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