लेखनी/LEkhni-सितंबर-अक्तूबर 26

सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
Bridging The Gap

‘जो कुछ अपरिचित हैं
वे भी मेरे आत्मीय हैं’

विनोद कुमार शुक्ल

(वन, जीव और प्रकृति संरक्षण विशेषांक)
(अंक १६८-वर्ष २०)

इस अंक मेंः
अपनी बातः ये जैविक रिश्ते।

कविता- जन्माष्टमी विशेषः चितचोर कृष्ण- शैल अग्रवाल। माह विशेष सब आत्मीय हैं-दिनेश शुक्ल,शैल अग्रवाल। कविता धरोहरः गजानन माधव मुक्तिबोध। कविता आज और अभीः ये झरते पत्ते- सविता सिंह, शैल अग्रवाल, इंदु झुनझुनवाला, रचना श्रीवास्तव, विनोद शुक्ल, कन्हैया लाल नंदन, ऋषभ देव शर्मा, शैलेश वीर।

लेखनी संकलनः हिन्दी हम सबकी परिभाषा-ताराचंद नादान, समीर उपाध्याय, पद्मा मिश्रा, हरिहर झा, शैल अग्रवाल, भारतेन्दु हरिश्चन्द, महेन्द्र प्रताप पांडे नन्द, रामेश्वर कम्बोज हिमांशु, बालकवि बैरागी, पूर्णिमा बर्मन, गिरीष पंकज, सरस्वती माथुर, प्राण शर्मा, लक्ष्मीमल सिंघवी, आर के पालीवाल, मधुप मोहता, गौतम सचदेव, रेणु राजवंशी गुप्ता, ओम निश्चल।

गद्य में मंथनः मूक सहवासी-शैल अग्रवाल। ललितः सितंबर-रुचि शर्मा, परिचर्चाः हिन्दी और भावी पीढ़ी-शैल अग्रवाल। संस्मरणः बकरी खरीद लो-मुंशी प्रेमचन्द। मेरी प्यारी बिल्लियाँ-स्मिता बतरा, मैं तुम्हारा गुनहगार हूँ- रूपसिंह चन्देल। मोती-शैल अग्रवाल।कहानी धरोहरः दो बैलों की कथा-मुंशी प्रेमचंद। मैमूद-शैलेश मटियानी। कहानी समकालीनः भेड़िया-शैल अग्रवाल । बाल कहानीः मिठ्ठू-मुंशी प्रेमचंद। बाल कहानीः गुब्बारे पर चीता। बाल कोना- बाल गीत।

in The English Section;

परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल
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