बाल कहानी और कविताः रेणु चंद्रा

दुर्घटना से देर भली

मेहुल और सुनील दोनों पक्के दोस्त थे । दोनों ही आठवीं कक्षा में अच्छे नम्बरों से उतीर्ण हुए थे और अब नौवीं कक्षा में आ गये थे । पहले वाला स्कूल आठवीं तक था और उनके घर के पास ही था । वहाँ तो वे दोनों पैदल ही चले जाते थे । लेकिन अब यह ’सीनियर सेकेन्डरी स्कूल’उनके घर से थोड़ा दूर था । अत: दोनों ने ही स्कूल जाने के लिये साइकिल ले ली थी । यह नौवीं से बारहवीं कक्षा तक का स्कूल था ।
दोनों ही स्कूल जाने के लिये साइकिल से सुबह साथ-साथ ही निकलते थे । और साथ ही घर वापस आते थे । रास्ते में कई चौराहे पड़ते थे । जगह-जगह लाल बत्ती होने से रुकना पड़ता था और समय भी लग ही जाता था । स्कूल जाने का एक रास्ता और भी था लेकिन वह सुनसान राह से होकर जाता था जहाँ अक्सर चोर-उचक्कों का डर रहता था । इसलिए उनके माता-पिता ने उधर से जाने को मना किया था ।
मेहुल बहुत सधा हुआ लड़का था । वह सदा घर से जल्दी निकल कर समय से स्कूल पहुँचना पसंद करता था । लेकिन सुनील आलसी और लापरवाह लड़का था । वह सुबह घर से निकलने में देर कर देता था और फिर हड़बड़ाहट करता था । रास्ते में मेहुल को भी परेशान करता था । कभी साइकिल तेज चलाता तो कभी रेड लाइट होने पर गुस्सा करता था और कहता,
“फिर से रेड लाइट हो गयी । देर हो जायेगी ।”
मेहुल हमेशा उसे समझाने की कोशिश करता रहता था । कहता,”यह लाल बत्ती हमारी सुविधा के लिये ही होती है ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे । तुझे देर होने की इतनी चिन्ता है तो घर से जल्दी तैयार होकर निकला कर ।”
“तू हमेशा रेड लाइट पर आकर ही क्यों शोर मचाता है ?”
सुनील जब कभी भी चौराहे पर हरी बत्ती होने से पहले ही निकलना चाहता था, मेहुल उसे धमकी देकर कहता था ,”तू ऐसे ही करेगा तो कल से मैं तेरे साथ नहीं आऊँगा ।”

प्रकृति से कुछ सीखें

आओ हम सब मिलकर
प्रकृति से कुछ सीखें ।

ओजस्वी सूरज से सीखें
निराश मन में आशा जगाना
अँधकार मिटाकर जग में
हर तरफ प्रकाश फैलाना,

धीर गंभीर पर्वत से सीखें
अविचल सदा खड़े रहना
तूफ़ानों से ना घबराना
डट कर मुकाबला करना,

आओ सरल नदिया से सीखें
शीतल रह कर प्यास मिटाना
हरे भरे खेतों को सरसा कर
सदा आगे को बढ़ते जाना,

आओ हम वृक्षों से सीखें
राह में राही को छाया देना
भूखे की भूख मिटा कर
मानवता का पाठ पढ़ाना,

रंग बिरंगे फूलों से सीखें
चहुँ ओर महक लुटाना
हर चेहरे पर फिर देखो
मधुर मुस्कान खिलाना ।

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