रूबरू बैठे हैं फिर भी,, गुफ़्तगू होती नही,
कैसे कह दूँ दिल को तेरी आरज़ू होती नही?
बेवफ़ा किसको कहें ये है ग़ज़ब-सी दास्ताँ,
सच कहूँ चादर मुहब्बत की रफ़ू होती नही।
बात दिल की वो समझ लेंगे यक़ीं होता नहीं!
रूह ख़ुद भी,,, है परेशाँ,,, रूबरू होती नही।
जानता हूँ, दिलरुबा मैं, ज़िंदगी का,, फलसफ़ा,
कौन कहता ख़्वाब में इक, ख़ूब-रू1 होती नही।
ये बताओ क्यों वफ़ा के साज़ अब चुप हो गए,
देखता हूँ,, आशिक़ी की ,, आबरू होती नही।
जाके उनसे पूछ लो दिल से मुहब्बत कैसे हो?
हाय दिल की,, दास्ताँ अब, कूबकू2 होती नही।
ढूँढता कब तक रहेगा प्यार की ख़ुशबू ’कमल’,
क्या तुझे अब, गर्दिशों की जुस्तजू होती नही?
छुपाकर दर्द सीने में, गुज़ारी ज़िन्दगी हमने,
मुहब्बत के अक़ीदे पर, थी वारी ज़िन्दगी हमने,
किसी की आरज़ू ही पर, तो हारी ज़िन्दगी हमने,
ग़मों की धूप में हंसकर, संवारी ज़िन्दगी हमने,
अभी तक अपने माज़ी का, ये शायद बोझ है ढोती …
न जाने कौन सा ग़म है, ये आँखें क्यों नहीं सोती?
जब उसकी रूह से रिश्ता, जुड़ा तो बढ़ गईं चाहें,
नहीं हम कह सके कुछ भी, महज़ भरते रहे आहें,
उसी के ही ख़यालों की, हमें घेरे रही बाहें,
वो मंज़िल है मगर पहुँची, नहीं उस तक कभी राहें,
हवाएँ टूटे पत्तों की, कभी रहबर नहीं होती ..
न जाने कौन सा ग़म है, ये आँखें क्यों नहीं सोती?
सितम जानम, मुहब्बत के, सहेंगे इश्क़ तुमसे है,
बताएँ किस, ज़ुबाँ से आशिक़ी में दर्द उनसे है,
वफ़ा कैसी, जफ़ा किसकी, ख़ला में रंज जिनसे है,
तुम्हीं जाकर, बताओ ये, ख़िज़ाँ में ज़ख़्म किनसे है,
मुरव्वत ही, हक़ीक़त है, अक़ीदत अश्क है ढ़ोती …
न जाने कौन सा ग़म है, ये आँखें क्यों नहीं सोती?

करम तेरा सच्चा साथी, भगवान तो तू ख़ुद करम से है,
दुनिया तुझको क्या देगी, धनवान भला तू जनम से है …
हिस्से में तेरे जो आया, वो तेरा अपना ही हिस्सा है,
सदियों से जो घटता आया, तेरा अपना ही क़िस्सा है,
भगवान छुपा तेरे अन्तर, तू चाहे किसी धरम से है …
दुनिया तुझको क्या देगी, धनवान भला तू जनम से है …
ज़िन्दा रहकर तू मरता है, मरकर भी ज़िन्दा रहता है,
कर्मो का दीपक जलने दे, जो बुझ के रौशन करता है,
“रूमी” ने कितना ठीक कहा! सनम तेरा, सनम से है ..
दुनिया तुझको क्या देगी, धनवान भला तू जनम से है …
पाप पूण्य सब झूठे हैं, गर मन में तेरे खोट नहीं,
दुनिया तो आनी जानी है, फूलों को देखो चोंट नहीं,
सच्चाई घट माही है, तू काहे को इस भरम में है …
दुनिया तुझको क्या देगी, धनवान भला तू जनम से है,
करम तेरा सच्चा साथी, भगवान भला तू करम से है …

सत्यं शिवं सुन्दरम
मनवा जिसे तू ढूँढता अक्सर, वो तेरे ही अंदर है,
प्रभु ह्रदय में तेरे, तू सत्य, तू शिव, तू ही सुंदर है ..
ये पाँच इंद्रियाँ जो भी बतलाए वो सच नहीं होता,
जो देखता तू इन आँखों से वो पूरा सच नहीं होता,
लहरें, बूँदें खुद ही समुंदर उनको पता नहीं होता,
धड़कता जो भी साँसों में वही तो सच्चा मंदिर है ..
प्रभु तेरे ह्रदय में, तू सत्य, तू शिव, तू ही सुंदर है ..
प्रभु की ये अद्भुत रचना करुणा और प्रेम बरसाएँ,
प्रकृति पूजा करके मैं-तुम मिलकर हम बन जाएँ,
द्वैत नैनों की सीमा ज्ञान ज्योति तम को मिटाएँ,
इंसाँ ये मान ले दिल की जन्म से तू तो कलंदर है ..
प्रभु तेरे ह्रदय में, तू सत्य, तू शिव, तू ही सुंदर है ..
धरती-पर्वत, नदियाँ-सागर सब उसकी रचना है,
पुष्पों में महक,फलों में मिश्री क्या कोई घटना है,
साँसों में गूँजे अनहद, ये प्रभु की अद्भुत कविता है,
शिवोहम सत्-चित्-आनंद और तू ही मनोहर है ..
कमल किशोर राजपूत ‘कमल’ बैंगलुरु,
जन्म देवास म.प्र., इंजीनियर -(आईआईटीयन), वरिष्ठ वैज्ञानिक – रक्षामंत्रालय, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति उपरांत निजी आई.टी. कंपनी, डॉक्टर्स और इंजीनियर्स के लिए विशेष समाधान और अब सूफ़ी शायर/कवि.
गीतों, भजनों, गज़लों, और नज़्मों के 7 संग्रह प्रकाशित हुए हैं, “रक़्से-बिस्मिल” ग़ज़ल संग्रह को मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा “शम्भू दयाल सुखन” विशिष्ट पुरस्कार से नवाज़ा गया मार्च 2022 में।
75+ वीडियोस: गीतों, भजनों, गज़लों, गीतों और नज़्मों के UTube पर उपलब्ध। चार वीडियो ऐल्बम: “अनुगूंज” – भजन, “अंदाज़े-बयाँ”, “रक़्से-बिस्मिल” एवं “काश!” (ग़ज़ल)।
सूफ़ी गीत विश्व-विख्यात कबीर गायक पद्मश्री प्रह्लादसिंह तिपानियाजी ने गाया।
लोकगीतों के प्रसिद्ध गायक मामेखान जी ने भी पाँच गीतों को गाया है।
माँ कृपा से एक जीवन में साइंटिस्ट, आई.टी. उद्यमी एवम् कवि/शायर बनने का प्रसाद मिला