
जो कुछ अपरिचित हैं
वे भी मेरे आत्मीय हैं
मैं उन्हें नहीं जानता
जो मेरे आत्मीय हैं।
कितने लोगों,
पहाड़ों, जंगलों, पेड़ों, वनस्पतियों को
तितलियों, पक्षियों, जीव-जंतु
समुद्र और नक्षत्रों को
मैं नहीं जानता धरती को
मुझे यह भी नहीं मालूम
कि मैं कितनों को नहीं जानता।
सब अत्मीय हैं
सब जान लिए जाएँगे मनुष्यों से
मैं मनुष्य को जानता हूँ।
विनोद कुमार शुक्ल

फूल बगिया सुन्दर सुहानी
फलों से लदी-फंदी डालियाँ
धरती झरने नदी और वावरी
सभी तो हैं मां हमारी
प्यार लुटाएँ, प्यास बुझाएँ
अनिल अनल दोनों ही प्यारे
जीवन देते और देते जीवन दान
अनल उर्जा पर ही तो पकते
हमारे सभी स्वादिष्ट पकवान
आभार गगन का, धरती का
बहते हुए मस्त पवन का
जिसने भी साथ निभाया
राग नहीं वैराग नहीं
कर्म करते जाते
आभार सभी अपनों का
आभार सूरज चांद तारों का
नभ पर चढ़े जो खिलखिलाते
पहाण पक्षी और प्रकृति का
बादल धूप और पानी का
कितना कुछ ये हमें दे जाते
सोचना अब यह है आगे
क्या हम इनको हैं दे पाते?
शैल अग्रवाल