लेखनी/Lekhni-मार्च-अप्रैल 18

सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
Bridging The Gap

( मुखपृष्ठ छायांकनः शैल अग्रवाल)

पतझण में नित बसंत तलाशूँ
और बसंत में बरखा को तरसूँ
घूमूँ सूरज,चांद,तारों-सा
फिर-फिरके वही गगन निहारूँ
अपनी धरती से जुड़ा खड़ा
गोद में जिसकी शिशु-सा नित सोया-जागा
आकुल उर्मियों को बाहों में भरता-उलीचता
सफर में हूँ और सफर में भी नहीं मैं

-शैल अग्रवाल

पर्यटन विशेषांक
वर्ष 12-अंक 114
परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल
संपर्क सूत्रः shailagrawal@hotmail.com

इस अंक मेंः अपनी बात। केदारनाथ सिंह को याद करते हुएः कविताएँ। कविता धरोहरः महादेवी वर्मा। माह के कविः शशिकांत। दोहेः नरेश शांडिल्य। गीत और गजलः ताराचन्द शर्मा। कविता आज और अभीः बीनू भटनागर, पंखुरी सिन्हा, सुशांत सुप्रिय, शैल अग्रवाल ।

पर्यटन और मनोविज्ञानः शील निगम। मंथनः ये यात्राएँः शैल अग्रवाल। न्यूजिलैंडः हरिहर झा। सरयू से बागमती तक एक सांस्कृतिक यात्राः उर्मिला शुक्ल। लहर-लहर किनारे-यूरोप के ऐतिहासिक शहर- शैल अग्रवाल। जगन्नाथ पुरीः पद्मा मिश्रा। कहानी समकालीनः बंटवारा-सुशांत सुप्रिय। कहानी समकालीनः धुंध के उस पार-देवी नागरानी । कहानी समकालीनः एक थी माया-विजय कुमार सप्पत्ति । कहानी समकालीनः दर्शकः शैल अग्रवाल। दो लघुकथाएँ-प्राण शर्मा। रूबरूः गोवर्धन यादव-देवी नागरानी। हास-परिहासः दोपहर की चाय-हरिहर झा। चांद परियाँ और तितली-बाल कहानीः ह्यूरान नदी का ब्रिज और व्ह्यटी-अरुणा घवाना, बाल कविताः माँ जब मैं बड़ा हो जाऊं-शैल अग्रवाल।

in the English Section: My column. Talk About what the travellers said. Favourite forever:Ted Huges. Poetry Here & Now: Martin Underwood, Shail Agrawal. Wide Angle: From India back to U.S- S mitra Kalita. Kids’ Corner: A Jatak Tale and a poem by Satchi Antoinette D’Sa