साहित्य और संस्कारों की सांझी धरोहरः ब्रिटेन से प्रकाशित एकमात्र द्विभाषीय और द्विमासिक पत्रिका.

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लेखनी/LEKHNI

राष्ट्रीय ख्यााति के अम्बिका प्रसाद दिव्य: पुरस्कार घोषित

18/04/2017 0

भोपाल। साठ महत्वयपूर्ण ग्रंथों के सर्जक एवं चार सौ चित्रों के चित्रकार स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में, विगत उन्नीस वर्षो से दिये जा रहे दिव्य पुरस्कारों की घो‍षणा 16 मार्च, 2017 को दिव्य […]

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पर्यटन पर हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

28/03/2017 0

हिन्दी विभाग, मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय, मुम्बई एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद,दिल्ली द्वारा १६ और १७ मार्च २०१७ को एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन का विषय था- पर्यटन: सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य। […]

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असाधरण चुनाव के असाधरण नतीजेः डा. नीलम महेन्द्र

22/03/2017 1

“हमारा अतीत हमारे वर्तमान पर हावी होकर हमारे भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगा देता है ” , एक कटु सत्य । ‘ सबका साथ,सबका विकास ‘ क्या संभव हो पाएगा जब यूपी में होगा योगी […]

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स्त्री साहित्य पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

20/03/2017 0

साठ्ये महाविद्यालय, विले पार्ले, मुंबई के तत्वावधान में ‘स्त्री साहित्य’ विषय पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का उद्घाटन जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति डॉ. हरिमोहन ने किया। बीज वक्तव्य प्रख्यात […]

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8 मार्च नारी दिवस परः नीलम महेन्द्र

08/03/2017 0

महिलाओं ने स्वयं अपनी ‘आत्मनिर्भरता ‘ के अर्थ को केवल कुछ भी पहनने से लेकर देर रात तक कहीं भी कभी भी कैसे भी घूमने फिरने की आजादी तक सीमित कर दिया है। काश कि […]

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यह हैं असली नायिकाएँः डॉ. नीलम महेन्द्र

29/01/2017 0

भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है ।इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया […]

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जब प्रधानमंत्री के हाथों में झाड़ू होता है तो कोई सवाल नहीं करता लेकिन उन्हीं हाथों में चरखा आ जाता है तो मुद्दा बन जाता है?.

16/01/2017 0

सबको सम्मति दे भगवान यह सही है कि लफ्जों में इतनी ताकत होती है कि किसी पुरानी डायरी के पन्नों पर कुछ समय पहले चली हुई कलम आज कोई तूफान लाने की क्षमता रखती है […]

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हिन्दी को बचाने के लिए सक्रिय प्रतिरोध जरूरी

14/01/2017 0

आज हिंदी के भविष्य और अखंडता के समक्ष इतिहास का सबसे बड़ा संकट उपस्थित है । यह समय प्रतीक्षा करो और देखो का नहीं है ।अब सक्रिय प्रतिरोध और स्वर बुलंद करने का है । […]

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पर्यावरण विद अनुपम मिश्र का निधन

10/01/2017 0

प्रसिद्ध पर्यावरणविद, जल संरक्षण कार्यकर्ता और गांधीवादी अनुपम मिश्रा का सोमवार दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वो 68 साल के थे। मिश्र पिछले कुछ सालों से प्रोस्ट्रैट कैंसर से पीड़ित थे। मिश्र को […]

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