About Lekhni
भाषा और भूगोल की सीमाएँ तोड़ती, विश्व के उत्कृष्ट और सारगर्भित ( प्राचीन से अधुधिनिकतम) साहित्य को आपतक पहुंचाती लेखनी द्विभाषीय ( हिन्दी और अंग्रेजी की) मासिक ई. पत्रिका है जो कि इंगलैंड से निकलती है। वैचारिक व सांस्कृतिक धरोहर को संजोती इस पत्रिका का ध्येय एक सी सोच वालों के लिए साझा मंच (सृजन धर्मियों और साहित्य व कला प्रेमियों को प्रेरित करना व जोड़ना) तो है ही, नई पीढ़ी को इस बहुमूल्य निधि से अवगत कराना...रुचि पैदा करना भी है। I am a monthly e zine in hindi and english language published monthly from United Kingdom...A magzine of finest contemporary and classical literature of the world! An attempt to bring all literature and poetry lovers on the one plateform.
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लेखनी/Lekhni

स्त्री साहित्य पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

20/03/2017 0

साठ्ये महाविद्यालय, विले पार्ले, मुंबई के तत्वावधान में ‘स्त्री साहित्य’ विषय पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का उद्घाटन जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति डॉ. हरिमोहन ने किया। बीज वक्तव्य प्रख्यात […]

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लेखनी/Lekhni

होली के विविध रंगः शैल अग्रवाल

12/03/2017 0

रक्षाबन्धन की अवधारणा यदि विप्र और सुकुमार वर्ण के संरक्षण हेतु  कभी की गई होगी, तो दशहरा शौर्य प्रदर्शन यानी क्षत्रियों  के लिए रचा गया था। दीपावली व्यापारियों की संतुष्टि के लिए थी तो होली आम जनता यानी शूद्रों का  […]

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लेखनी/Lekhni

8 मार्च नारी दिवस परः नीलम महेन्द्र

08/03/2017 0

महिलाओं ने स्वयं अपनी ‘आत्मनिर्भरता ‘ के अर्थ को केवल कुछ भी पहनने से लेकर देर रात तक कहीं भी कभी भी कैसे भी घूमने फिरने की आजादी तक सीमित कर दिया है। काश कि […]

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लेखनी/Lekhni

यह हैं असली नायिकाएँः डॉ. नीलम महेन्द्र

29/01/2017 0

भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है ।इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया […]

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लेखनी/Lekhni

जब प्रधानमंत्री के हाथों में झाड़ू होता है तो कोई सवाल नहीं करता लेकिन उन्हीं हाथों में चरखा आ जाता है तो मुद्दा बन जाता है?.

16/01/2017 0

सबको सम्मति दे भगवान यह सही है कि लफ्जों में इतनी ताकत होती है कि किसी पुरानी डायरी के पन्नों पर कुछ समय पहले चली हुई कलम आज कोई तूफान लाने की क्षमता रखती है […]

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हिन्दी को बचाने के लिए सक्रिय प्रतिरोध जरूरी

14/01/2017 0

आज हिंदी के भविष्य और अखंडता के समक्ष इतिहास का सबसे बड़ा संकट उपस्थित है । यह समय प्रतीक्षा करो और देखो का नहीं है ।अब सक्रिय प्रतिरोध और स्वर बुलंद करने का है । […]

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लेखनी/Lekhni

पर्यावरण विद अनुपम मिश्र का निधन

10/01/2017 0

प्रसिद्ध पर्यावरणविद, जल संरक्षण कार्यकर्ता और गांधीवादी अनुपम मिश्रा का सोमवार दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वो 68 साल के थे। मिश्र पिछले कुछ सालों से प्रोस्ट्रैट कैंसर से पीड़ित थे। मिश्र को […]

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लेखनी/Lekhni

जाना एक जन कवि का

10/01/2017 0

श्रद्धांजलि… जाना एक जनकवि का…. अभावों में जन्मे, अभावों में पले, और हम मर गए, अभावों के तले. लकड़ियाँ भी थीं इतनी कि रह गए अधजले. इन हृदयविदारक पंक्तियों के रचनाकार जगदीश ‘सुधाकर’ अभी इसी […]

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लेखनी/Lekhni

करवा चौथ की बधाई और शुभकामनाएँ।

18/10/2016 0

चंद्र-दर्शन हर रात हमारे बीच रहकर भी पहुंच से दूर…एक चमकीला शीतल चेहरा बहुत सारी नजाकत और अदा के साथ पलपल बढ़ता-घटता, लुभाता भरमाता…कभी उदास तो कभी खूशी से भरपूर, पूरा का पूरा चमकता-दमकता। चांद […]

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