About Lekhni
भाषा और भूगोल की सीमाएँ तोड़ती, विश्व के उत्कृष्ट और सारगर्भित ( प्राचीन से अधुधिनिकतम) साहित्य को आपतक पहुंचाती लेखनी द्विभाषीय ( हिन्दी और अंग्रेजी की) मासिक ई. पत्रिका है जो कि इंगलैंड से निकलती है। वैचारिक व सांस्कृतिक धरोहर को संजोती इस पत्रिका का ध्येय एक सी सोच वालों के लिए साझा मंच (सृजन धर्मियों और साहित्य व कला प्रेमियों को प्रेरित करना व जोड़ना) तो है ही, नई पीढ़ी को इस बहुमूल्य निधि से अवगत कराना...रुचि पैदा करना भी है। I am a monthly e zine in hindi and english language published monthly from United Kingdom...A magzine of finest contemporary and classical literature of the world! An attempt to bring all literature and poetry lovers on the one plateform.
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लेखनी/Lekhni

उचित-अनुचितः शिबेन कृष्ण रैना

15/06/2017 0

एक मित्र ने हम पर तोहमत लगाई है कि हम कब से राष्टवादी हो गये?यानी जैसे अपने राष्ट्र के बारे में हित-चिन्तन करना कोई अपराध हो गया!अपने देश के हित-अहित के बारे मैं न लिखूँ-सोचूँ […]

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लेखनी/Lekhni

किताबों की राजधानी बने गांव की दास्तान…. हिंदुस्तान से साभार

15/06/2017 1

किंशुक पाठक, असिस्टेंट प्रोफेसर, बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, पटना जब मुद्रित माध्यमों यानी पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं के अस्तित्व पर ही बहस छिड़ी हो, तब ‘पुस्तकांचे गाव’ यानी पुस्तकों के गांव की संकल्पना का मूर्त रूप लेना इतिहास […]

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लेखनी/Lekhni

राष्ट्रीय ख्यााति के अम्बिका प्रसाद दिव्य: पुरस्कार घोषित

18/04/2017 0

भोपाल। साठ महत्वयपूर्ण ग्रंथों के सर्जक एवं चार सौ चित्रों के चित्रकार स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में, विगत उन्नीस वर्षो से दिये जा रहे दिव्य पुरस्कारों की घो‍षणा 16 मार्च, 2017 को दिव्य […]

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लेखनी/Lekhni

पर्यटन पर हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

28/03/2017 0

हिन्दी विभाग, मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय, मुम्बई एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद,दिल्ली द्वारा १६ और १७ मार्च २०१७ को एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन का विषय था- पर्यटन: सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य। […]

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लेखनी/Lekhni

असाधरण चुनाव के असाधरण नतीजेः डा. नीलम महेन्द्र

22/03/2017 1

“हमारा अतीत हमारे वर्तमान पर हावी होकर हमारे भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगा देता है ” , एक कटु सत्य । ‘ सबका साथ,सबका विकास ‘ क्या संभव हो पाएगा जब यूपी में होगा योगी […]

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लेखनी/Lekhni

स्त्री साहित्य पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

20/03/2017 0

साठ्ये महाविद्यालय, विले पार्ले, मुंबई के तत्वावधान में ‘स्त्री साहित्य’ विषय पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का उद्घाटन जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति डॉ. हरिमोहन ने किया। बीज वक्तव्य प्रख्यात […]

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लेखनी/Lekhni

होली के विविध रंगः शैल अग्रवाल

12/03/2017 0

रक्षाबन्धन की अवधारणा यदि विप्र और सुकुमार वर्ण के संरक्षण हेतु  कभी की गई होगी, तो दशहरा शौर्य प्रदर्शन यानी क्षत्रियों  के लिए रचा गया था। दीपावली व्यापारियों की संतुष्टि के लिए थी तो होली आम जनता यानी शूद्रों का  […]

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लेखनी/Lekhni

8 मार्च नारी दिवस परः नीलम महेन्द्र

08/03/2017 0

महिलाओं ने स्वयं अपनी ‘आत्मनिर्भरता ‘ के अर्थ को केवल कुछ भी पहनने से लेकर देर रात तक कहीं भी कभी भी कैसे भी घूमने फिरने की आजादी तक सीमित कर दिया है। काश कि […]

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लेखनी/Lekhni

यह हैं असली नायिकाएँः डॉ. नीलम महेन्द्र

29/01/2017 0

भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है ।इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया […]

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