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लेखनी/Lekhni

काश कि रेल बजट तकनीक केन्द्रित होताः नीलम महेन्द्र

August 21, 2017 0

बेहतर होता कि हमारी सरकारें देश के नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझतीं और सरकारी खजाने का प्रयोग  दुर्घटना होने के बाद दिए जाने वाले मुआवजे और जांचो में खर्च करने के बजाय उस […]

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लेखनी/Lekhni

यह कैसी व्यवस्था है? -नीलम महेन्द्र

August 8, 2017 0

क्यों हम बेटियों को बचाएँ “मुझे मत पढ़ाओ , मुझे मत बचाओ,, मेरी इज्जत अगर नहीं कर सकते ,तो मुझे इस दुनिया में ही मत लाओ मत पूजो मुझे देवी बनाकर तुम ,मत कन्या रूप […]

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लेखनी/Lekhni

जीएसटी अधूरा ज्ञान या फिर दुष्प्रचारः डॉ. नीलम महेन्द्र

July 7, 2017 0

30 जून 2017 भारतीय इतिहास में 8 नवंबर के बाद एक और ऐतिहासिक तारीख़ यहाँ 8 नवंबर का जिक्र इसलिए किया गया है क्योंकि नोटबंदी काले धन पर प्रहार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम […]

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लेखनी/Lekhni

साहित्य को समदर्शी होना चाहिए-डॉ. शिबेन कृष्ण रैना

July 7, 2017 0

धर्म,जाति अथवा सम्प्रदाय से जुड़े किसी भी संवेदनशील मामले को लेकर हत्या किसी की भी हो या कोई भी करे,एक जघन्य अपराध है।कानून को तुरंत इस बारे में कार्रवाई करनी चाहिए और अपराधी को कठोर […]

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लेखनी/Lekhni

विरोध का गिरता स्तर गोवध

June 16, 2017 1

किसी भी राज्य या फिर राष्ट्र की उन्नति अथवा अवनति में राजनीति की एक अहम भूमिका होती है। मजबूत विपक्ष एवं सकारात्मक विरोध की राजनीति विकास के लिए आवश्यक भी हैं लेकिन केवल विरोध करने […]

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लेखनी/Lekhni

A GLOWING TRIBUTE TO INDIAN SOLDIERS

June 16, 2017 0

London, 8 June 2017: A glowing tribute was paid to the Indian soldiers in a specially organized programme at The Nehru Centre-London through poetry and film songs. After a warm welcome by Vibha Mehdiretta, Deputy […]

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लेखनी/Lekhni

उचित-अनुचितः शिबेन कृष्ण रैना

June 15, 2017 0

एक मित्र ने हम पर तोहमत लगाई है कि हम कब से राष्टवादी हो गये?यानी जैसे अपने राष्ट्र के बारे में हित-चिन्तन करना कोई अपराध हो गया!अपने देश के हित-अहित के बारे मैं न लिखूँ-सोचूँ […]

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लेखनी/Lekhni

किताबों की राजधानी बने गांव की दास्तान…. हिंदुस्तान से साभार

June 15, 2017 1

किंशुक पाठक, असिस्टेंट प्रोफेसर, बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, पटना जब मुद्रित माध्यमों यानी पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं के अस्तित्व पर ही बहस छिड़ी हो, तब ‘पुस्तकांचे गाव’ यानी पुस्तकों के गांव की संकल्पना का मूर्त रूप लेना इतिहास […]

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लेखनी/Lekhni

राष्ट्रीय ख्यााति के अम्बिका प्रसाद दिव्य: पुरस्कार घोषित

April 18, 2017 0

भोपाल। साठ महत्वयपूर्ण ग्रंथों के सर्जक एवं चार सौ चित्रों के चित्रकार स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में, विगत उन्नीस वर्षो से दिये जा रहे दिव्य पुरस्कारों की घो‍षणा 16 मार्च, 2017 को दिव्य […]

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