2017
8 मार्च नारी दिवस परः नीलम महेन्द्र
महिलाओं ने स्वयं अपनी ‘आत्मनिर्भरता ‘ के अर्थ को केवल कुछ भी पहनने से लेकर देर रात तक कहीं भी कभी भी कैसे भी घूमने फिरने की आजादी तक सीमित कर दिया है। काश कि […]
यह हैं असली नायिकाएँः डॉ. नीलम महेन्द्र
भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है ।इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया […]
जब प्रधानमंत्री के हाथों में झाड़ू होता है तो कोई सवाल नहीं करता लेकिन उन्हीं हाथों में चरखा आ जाता है तो मुद्दा बन जाता है?.
सबको सम्मति दे भगवान यह सही है कि लफ्जों में इतनी ताकत होती है कि किसी पुरानी डायरी के पन्नों पर कुछ समय पहले चली हुई कलम आज कोई तूफान लाने की क्षमता रखती है […]
हिन्दी को बचाने के लिए सक्रिय प्रतिरोध जरूरी
आज हिंदी के भविष्य और अखंडता के समक्ष इतिहास का सबसे बड़ा संकट उपस्थित है । यह समय प्रतीक्षा करो और देखो का नहीं है ।अब सक्रिय प्रतिरोध और स्वर बुलंद करने का है । […]
पर्यावरण विद अनुपम मिश्र का निधन
प्रसिद्ध पर्यावरणविद, जल संरक्षण कार्यकर्ता और गांधीवादी अनुपम मिश्रा का सोमवार दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वो 68 साल के थे। मिश्र पिछले कुछ सालों से प्रोस्ट्रैट कैंसर से पीड़ित थे। मिश्र को […]
जाना एक जन कवि का
श्रद्धांजलि… जाना एक जनकवि का…. अभावों में जन्मे, अभावों में पले, और हम मर गए, अभावों के तले. लकड़ियाँ भी थीं इतनी कि रह गए अधजले. इन हृदयविदारक पंक्तियों के रचनाकार जगदीश ‘सुधाकर’ अभी इसी […]