चांद परियाँ और तितलीः बाल कविताएँः श्याम कुमारी

तीन प्रश्न

अम्मां, मुझे बताओ तुम
सपने कैसे आते हैं?
परी देश को पल भर में,
हम सब को ले जाते हैं।

अम्मा मुझे बताओ तुम
बादल कैसे आते हैं?
घुमड़-घुमड़ जो पल भर में
अंबर में छा जाते हैं।

अम्मां जरा बताओ तुम,
प्रभुजी कैसे मिलते हैं-
एक अकेले होकर भी
कैसे सब में बसते हैं?

पूजा की बेला

ऊषा की बेला,
किरणों का मेला, सूरज जगाए हमें
पूजा की बेला।


रूप
जगमग-जगमग दूध कटोरा,
मुन्ना चंदा से भी गोरा।
जगमग माखन भरी कटोरी,
मुन्नी चांदनी सी गोरी।

मेरी लाडली
सोने की कली
सूरज सी खिली,
मेरी लाडली।

मिसरी की डली,
तन-मन में घुली,
मेरी लाडली।

सपने

चांदी की किरणें,
सोने के सपने,
परियां सुलाएँ हमें
झुका के पलकें।

कहानी

चंदा मुस्काए
मां कहे कहानी।
धीरे से आए
निंदिया की रानी।
चंदा मुस्काए
मां कहे कहानी।

परी देश

अम्मा मुझको ले चल तू
एक बार परियों के देश।
एक बार बस मुझे दिखा दे
है कैसा सपनों का देश।

सोना-जागना

रात रुपहली
लोरी गाए,
हमें सुलाए।

सुबह सुनहली
धूप सजाए,
हमें जगाए।

दूध-मलाई

मजेदार थी दूध-मलाई
पाकर खुशबू बिल्ली आई।
झट कुछ खाई, कुछ बिखराई,
मूछों में भी कुछ लिपटाई।
बरतन खनका, सुनकर आहट
अम्मा झटपट दौड़ी आई।
हाय बिलैया ने चट कर दी
सारी रबड़ी और मलाई।

टनटन

स्कूल की घंटी,
मंदिर का घंटा,
टन-टन बजता,
अच्छा लगता।

पंछी

नन्हे कोमल पर फैला कर
उड़ते जब तुम नील गगन पर,
लगता फूल खिले हों नभ में
या नौका तैरती गंगा में।

बुलबुल

नन्ही-नन्ही बुलबुल आ जा,
फुदक-फुदक कर नीचे आ जा।
थोड़ा सा दाना तो खा जा,
मीठे-मीठे गीत सुना जा ।

चारा-चुग्गा हर दिन दूंगी,
पिंजरे में मैं नहीं रखूंगी।
प्यारी चिड़िया नीचे आ जा,
गाना गाकर मन बहला जा।


बलवान
मैं भीम के समान
बन जाऊँ बलवान।
राक्षसों को मारूँ
श्री राम के समान।

पूरा ज्ञान पाऊँ,
पर्वत को उठाऊँ
हनुमान के समान।


वर्षा

कलकल-कलकल नदिया बहती
झरझर-झरझर झरना झरता,
उमड़-घुमड़कर बादल गरजे,
रिमझिम-रिमजिम पानी बरसा।

जन्म-दिन

मां, रमिया ने बरतन मांजे,
सारे घर की करी सफाई,
आज जनम दिन पर मेरे तुम
उसको दो भरपेट मिठाई।

उसके बच्चों को भी दे दो
तुम कुछ टॉफ़ी और मिठाई।
नहीं जानते वे बेचारे
लगती कैसी केक मलाई।

आज जनम दिन पर मेरे तुम
सबको दो भरपेट मिठाई।

साभार ‘बाल रंग-तरंग 24 शिशु गीत’ से

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