लेखनी/Lekhni-विशेषः हमारे त्योहार

सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
Bridging The Gap

(अंक 137-वर्ष 15)
‘उजास भरे
सजे ड्योढ़ी पर
नेहिल दिए’
-शैल अग्रवाल
वर्षांत के ज्योतिर्मय त्योहार- नवरात्रि, दशहरा, करवाचौथ, दिवाली और क्रिसमस

इस अंक मेंः कविता धरोहरः राम-राज्यः गोस्वामी तुलसीदास। संकलनः दीप माला। गीत और ग़ज़लः आचार्य सारथी ‘रूमी’, गिरीष पंकज, रामनिवास ‘मानव’ । हायकू करवा चौथः सरस्कवती माथुर, शैल अग्रवाल। हायकू दीपावलीः रमा सिंह, शैल अग्रवाल। क्रिसमस कवितायें-सरस्वती माथुर।
विजयदशमी पर एक पत्रः डॉ. विद्या निवास मिश्र। ललितः आलोक पर्व की ज्योतिर्मय देवीः हजारी प्रसाद द्विवेदी। ललितः अंधेरे के पक्ष में उजाला-प्रेम जनमेजय । कलाः भारतीय दीपों की मनोहारी विविधता-हेमा गुहा। दीपों का पर्व दीपावलीः निरुपमा सिन्हा वर्मा। राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य हैः अयोध्या-पद्मा मिश्रा। सरयू से बागमती तक – एक सांस्कृतिक यात्राः उर्मिला शुक्ल। कहानी समकालीनः विसर्जन-शैल अग्रवाल। कहानी धरोहरः करवा का व्रत-यशपाल। कहानी समकालीनः चांद का मुंह टेढ़ा है-शैल अग्रवाल। कहानी धरोहरः रामलीला- मुंशी प्रेमचन्द। कहानी समकालीनः दिए की लौ-शैल अग्रवाल। हास्य व्यंग्यः इंटरव्यू रावण से-सुरेश अवस्थी।
चांद परियाँ और तितलीः दिवाली -तरुण अग्रवाल, शैल अग्रवाल।

ब्रिटेन से प्रकाशित द्विमासीय, द्विभाषीय (हिन्दी-अंग्रेजी) पत्रिका
परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल
संपर्क सूत्रः shailagrawal@hotmail.com

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