
भालू देखा बंदर देखा
और भी जाने क्या-क्या देखा
रंग-बिरंगे पूलों का मेला
हमने इन पन्नों के अंदर
मम्मी आओ बैठो संग
तुम्हें सुनाऊँ मैं इनके रंग
नए नए रंगों में सजा सुहाना
हमने जो यह मंजर देखा।
आ से आम और क से कबूतर
बोले एक दिन पन्नों के अन्दर
चलो उड़ें अब आकाश में हम
देखेंगे चन्दा और सूरज के घर
आम खो गया चन्दा में जाकर
थके कबूतर के टूटे पर
मुन्ना ढूँढे अब पलट के पन्ने
ब से बिल्ली और ख से खरगोश
उछलेंगे जो उसके लौन पर आकर
खेलेगा फिर वह इनके संग।

चूँ चूं चिड़िया सभा बुलाए
शहर-शहर पर्ची छपवाए
सुबह-सुबह ही आ जाना है
मिलने और मिलाने के बाद
फिर अच्छा अच्छा खाना है।
बिल्ली मासी
बिल्ली मासी बिल्ली मासी
घूमी आज फिर तुम मनमानी
कभी छतपर तो कभी पेड़पर
देखे तुमने जाकर चंदा मामा
फूलों पर उड़ती तितली रानी
डराया क्या पर उस
नटखट चूहो को भी तुमने
कुतर किताब फाड़कर चुन्नी
करता जो इतनी बरबादी ?

झटपट मियाँ लाल बन्दर
समझें खुद को बड़ा सिकन्दर
जाकर डाल पर उलटे लटके
देते फूल फलों को झटके
डाली से जब टपका आम
झटपट मियां संग धड़ाम।
बंदर ने एक पैंट सिलाई
अच्छी सी जैकेट मंगवाई
फिटिंग पूंछ की सही ना आए
दरजी की अब आफत आई।

सु-मन
आज खिले हैं कल बिखरेंगे
बिखर-बिखरके फिर संवरेंगे
कोमल है तन-मन इनका
पर इरादा अटल और पक्का
कांटों पर भी जो मुस्काए
वह किसके मन को ना भाए
फूलों सा जिसने खिलना सीखा
उसने ही तो हर मन जीता।
हवा ने मारी सीटी
बादल ने लगाई छलांग
बरखा रानी छमछम नाचें
परियों की शादी में आज।
रिमझिम बूंदे उझलें कूदें
आंगन हिलमिल लंगड़ी खेलें
हाथ बढाऊं तो फिसली जाएं
बादल ने कितने मोती बिखराए।
काले बादल में भूत छुपा
गोरी बिजुरी के हाथ तलवार
रुके कैसे ये युद्ध घमासान
मेंढक राजा खूब टर्राए
बैठे-बैठे करें विचार।
छतरी रानी तनी खड़ीं
बरखा से वो खूब लड़ीं
रोज रोज तू आ जाती है
गरज बरसकर सताती है
अगली बारिश जब आएगी
भिगो नहीं अब पाएगी।
गिलहरी रानी बड़ी सयानी
जाड़े की करती रहती तैयारी
कुछ खातीं, कुछ को है बचाती
जहाँ-तहाँ छुपाकर रख आतीं
बुरे वक्त को रहो तैयार
संदेश सदा ही देती जातीं।
तारों की ठंडी छांव तले
तोता मैना उड़ते फिरे
नीले खुले आकाश तले
तोते नित गाता एक गीत
मैना, ओ मेरी प्यारी मैना
तुम-सा नहीं दूजा मनमीत।।
तुनतुन तुक तुनतुन तारा
गीत सुनाए यही एकतारा
सच्चे ने जग जीता
झूठे का मुंह काला
तुनतुन तुक तुनतुन तारा
गीत सुनाए यही एकतारा
जिसकी मीठी बोली
दुनिया उसकी हो ली
कड़वे संग ना कोई आता
तुनतुन तुक तुनतुन तारा
गीत सुनाए यही एकतारा
रोता जो सब कुछ है खोता
हंसते का ही तो जग होता
तुनतुन तुक तुनतुन तारा
गीत सुनाए यही एकतारा।

झिलमिल झिलमिल तारे
नभ पर फैले हैं सारे
हीरे से जो जगमग रातभर
लगते हमको कितने प्यारे
मुन्ने ने देखा और सोचा
रोज रात कहां से ये आते
कौन इन्हें लुढ़का जाता
नभ पर चढ़कर ये हमें लुभाते
कैसे मैं इनसे झोली भर लाऊँ
पहले सब में थोड़ा-थोड़ा बांटूँ
फिर मम्मी की साड़ी पर कुछ
कुछ पर्स पर और कुछ बालों पर
कुछ अपने बस्ते पर भी टांकू?

एक दो तीन चार
कितनी गिनती करो विचार
पांच छह सात और आठ
जब खूब बनाकर अपने ठाठ
नौ और दस को लेकर संग
होगए दौड़ते-हाँफते बस पर सवार
घूमते फिर रोज ही ये शहर-शहर
झूमते गाते मदमस्त इधर-उधर।।

इक्कड़-दुक्कड़, घूम घुमक्कड़
हल्ला गुल्ला, लुका छिपी
खेलो मिलजुल आंख-मिचोली
फिसल गिरे पर जब गुड़िया रानी
हाथ बढ़ाना तुम गुड्डे राजा
चुनमुन ने जब बस्ता लगाया
जाते-जाते खिलौनो को अच्छा
दोस्ती का फर्ज समझाया।
हंस-हंसनी से दादा दादी
मम्मी-पापा, चाचा-चाची
बुआ-फूफा, मामा-मामी
प्यारे-प्यारे नाना-नानी
हरेक की होती है एक जोड़ी
प्रेम-प्यार से पगी-बढ़ी
अकेला तो बस रहे अकेला
दुनिया ना कभी इसकी होली!

कभी बॉल सा इत उत घूमे
नीबू की फांक-सा मन ललचाए
कभी फूल के कुप्पा हो जाए
कभी पतली लकीर बन जाए
कभी सर्कस के जोकर-सा
पेड़ पहाड़ों पर दौड़े-भागे
नदी में सोए, जमीं पर जागे
रातभर देखा हमने इसे खेलते
बहुत ग़ज़ब का खिलाड़ी बंदा
चलो, छत पर ढूंढेगे आज फिर
कहाँ छुपा जाकर नटखट चंदा !
तोता-तोता
तोता, तोता, बोली टीचर मैना
सच्ची सच्ची एक बात बताना
दोहराय कब संग बैठकर तुमने पाठ
चार और चार होते हैं बस आठ
फुदक-फुदककर इतउत उड़ते-फिरते
रह- रहकर हरी मिर्च को कुतरते
रहता कहाँ पर है तुम्हारा ध्यान
हो जाती मेरी सारी मेहनत बेकार?

चिड़िया रानी
चिड़िया रानी बड़ी सयानी
ले-ले तिनके चोंच में उड़ती
सुन्दर सा एक घोंसला बुनती
उड़कर पहुंचूं मैं भी तो देखूँ जाकर
दे दे अगर यह अपने पंख उधार।
चंदा मामा
चंदा मामा नीचे आ जा
दूध-मलाई संग-संग खा जा।
मम्मी तो सो गईं हमारी
तू ही आकर हमें सुला जा।।

रात की कड़ाही में
पूरी-सा चंदा
कितने पास आ बैठा है
देखो माँ यह दूरी-का चंदा
प्लेट में दे दो इसको मुझे
मैं भी देखूँ छूकर -खाकर
ठंडा है, या गरम बहुत
छत पर जो मेरी आ लटका
हर रात ही प्यारा चंदा !
पत्ती रानी
बगिया के नाटक में देखी
हमने एक कहानी बड़ी सुहानी
पानी बरसा और धूप भी निकली
हवा के बैंड पर झूम-झूमके
नाची थिरकीं पत्ती रानी।