हिन्दी विभाग, मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय, मुम्बई एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद,दिल्ली द्वारा १६ और १७ मार्च २०१७ को एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन का विषय था- पर्यटन: सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर शशिकला वंजारी, कुलपति, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, मुंबई ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि पर्यटन पर इस सम्मेलन का आयोजन करना बहुत ही आवश्यक कदम है। इस विषय को अधिक से अधिक आगे बढ़ाने की ज़रूरत है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए साहित्य अकादमी दिल्ली के सदस्य आचार्य सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि आज पर्यटन को एक गंभीर विषय के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए जिससे इससे संबंधित आयामों का अध्ययन अध्यापन समुचित रूप से किया जा सके।
मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय की प्रचार्या डा. हर्षदा राठोड़ तथा हिन्दी विभाग के प्रमुख डा. रवींद्र कात्यायन के सफल प्रबंधन में देश के गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। मुम्बई और मुम्बई से बाहर विभिन्न राज्यों से आये पर्यटक,साहित्यकार, समाजशास्त्रज्ञ, समीक्षक,कलाकार, चित्रपट निर्माता, अभिनेता आदि की उपस्थिति में अनेक शोधकर्ताओं ने पर्यटन से सम्बन्धित शोधपत्र प्रस्तुत किये।
रोहतक विश्वविद्यालत की प्रोफ़ेसर रोहिणी अग्रवाल ने एक सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज हम बहुत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं और पर्यटन के लिए यह अच्छा नहीं है। पर्यटन हमारे जीवन और समाज के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। आज आवश्यकता है कि इसे गंभीरता से शोध और विमर्श के केन्द्र में लाया जाए।
थार अकेडमी के निदेशक डॉ सुधीर सोनी ने कहा कि पर्यटन द्वारा हम अपने समाज को समझ सकते हैं, अपनी संस्कृति से रूबरू हो सकते हैं।
सम्मलेन के संयोजक डा. रवींद्र कात्यायन ने कहा कि पर्यटन विश्व का सबसे बड़ा उद्योग है लेकिन इसके बारे में गंभीर अध्ययन की कमी है। आज आवश्यकता है कि इसे एक स्वतन्त्र विषय के रूप में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाए। पर्यटन हमारे समाज और संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। मणिबेन नानावटी महिला महाविद्यालय की प्रचार्या डा. हर्षदा राठोड़ ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया।
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