साहित्य अकादमी कितनी स्वायत्त, कितनी सरकारी
साहित्य जगत के, मेरे कुछ वरिष्ठ जन यह भूल रहे हैं कि आज से 61 वर्ष पूर्व जिस साहित्य अकादमी की स्थापना ही केन्द्रीय सरकार द्वारा की गई और इतना ही नहीं, उसका सारा विधान […]
साहित्य जगत के, मेरे कुछ वरिष्ठ जन यह भूल रहे हैं कि आज से 61 वर्ष पूर्व जिस साहित्य अकादमी की स्थापना ही केन्द्रीय सरकार द्वारा की गई और इतना ही नहीं, उसका सारा विधान […]
हिंदी सांस में है, पानी में, पहाड़ में, खेत में, सेल्फी में, शहर में, देहात में। इसलिए जाहिर है कि हिंदी की धमक मीडिया में भी है। 90 के दशक में जब निजी मीडिया भारत […]
नहीं रहे उत्कट जीवट के धनी बालशौरि रेड्डी (हिंदी-तेलुगु का एक सुदृढ़ सेतु गिर गया) यह अत्यंत दुखद समाचार है कि तेलुगु और हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, ‘चंदामामा’ के पूर्व संपादक और बालसाहित्यकार, उत्कट जीवट […]
नया इंडिया, 14 सितंबर 2015 विश्व-हिंदी : मूर्खतापूर्ण बातें डॉ वेदप्रताप वैदिक भोपाल में हुए 10 वें विश्व हिंदी सम्मेलन से बहुत आशाएं थीं| विदेशों में होनेवाले विश्व हिंदी सम्मेलनों से इतनी आशा कभी नहीं […]
बाइसवीं पावस व्याख्यानमालाः एक रपट -गोवर्धन यादव साहित्य का महातीर्थ हिन्दी भवन भोपाल. हिन्दी भवन भोपाल में आयोजित बाईसवीं पावस व्याख्यानमाला में, हिन्दी साहित्य के गौरव कवि प्रदीप एवं डा.शिवमंगल सिंह “सुमन” की जन्मशताब्दी […]
“अँखियाँ पानी पानी ” हिन्दी साहित्य जगत में भक्ति की इकलौती कृति है , ये शब्द थे पूर्व शिक्षा मंत्री एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा . नरेन्द्र कुमार सिंह गौर के । उन्होंने […]
“दुःख सन्तोष श्रीवास्तव की कहानियों का स्थाई भाव है ।उन्होंने दुःख को जिया है और ज़िन्दगी के कई रंग इनकी कहानियों में शिद्दत के साथ महसूस किये जा सकते हैं ये बातें सूरज प्रकाश […]
खुला मंच में साहित्य, शायरी, एवं संगीत की शानदार प्रस्तुति………. तुमभी एवं यात्री प्रस्तुत खुला मंच-4 का आयोजन 6 दिसम्बर 2014 को हुआ जिसमें एक से एक बेहतरीन कलाकारों, गायकों, कवियों, कलाकारों एवं संगीतकारों ने […]
बाएँ से दाएं: भगवान श्रीवास्तव ‘बेदाग़’, नरेश शांडिल्य, दिव्या माथुर, असगर वजाहत, कृष्णदत्त पालीवाल, कमल किशोर गोयनका, अजय नावरिया, लीलाधर मंडलोई, अनिल जोशी, अलका सिन्हा एवं प्रेम जन्मेजय 26 नवंबर, 2014, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी. […]
‘ उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा, दुनिया को हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए.‘ ‘हाथ‘ कविता की ये लाइनें लिखने वाले मशहूर कवि डॉ. केदारनाथ सिंह को सोमवार देर […]
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