हिन्दी अकादमी, दिल्ली और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में १७ सितम्बर, २०१४ को जे.एन.यू. परिसर के भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन संस्थान (SLL&CS) के समिति कक्ष संख्या २१२ में समसामयिक कहानी और कविता पाठ कार्यक्रम आयोजित किया गया. अपरान्ह २ बजे से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रो. असलम इलाही, डीन, भाषा संस्थान, जे.एन.यू. ने कहा कि साहित्य कहीं बाहर से नहीं आता, बल्कि हमारे बीच के लोग ही इसके पात्र होते हैं. हम सभी को समय के साथ चलना चाहिए और एक कलाकार ही अपनी कला से पत्थर को मूर्त रूप दे सकता है. इस अवसर पर जे.एन.यू. के कुल सचिव डॉ. संदीप चटर्जी ने कहा कि रचनाकारों का इस प्रकार से पाठकों के बीच जाना विज्ञान की ’लैब टु लैंड’ अवधारणा का सामाजिक विज्ञान और मानविकी में रूपांतरण है. इस अवसर पर तीन कथाकारों ने अपनी कहानियों का पाठ किया. युवा कथाकार प्रो. देवेन्द्र चौबे ने अपनी कहानी १७६४, वरिष्ठ कथाकार रूपसिंह चन्देल ने पाखी में प्रकाशित अपनी लंबी ’वहचेहरा’ और युवा कथाकार और पाखी पत्रिका के सम्पादक प्रेम भारद्वाज ने कथाक्रम के प्रेमकथा विशेषांक में प्रकाशित अपनी कहानी का पाठ किया.
कार्यक्रम में भारतीय भाषा केन्द्र के प्रो. रामबक्ष ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि सोवियत संघ के विघटन का दबाव मौजूदा साहित्य में है और इन नई परिस्थितियों में कल्पनाशीलता का लोप हो रहा है.
दूसरे सत्र में सायं ५ बजे से कविता पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रो. अखलाख अहमद आहन, डॉ. अनामिका, प्रो.जी.जे.वी प्रसाद, प्रो.गोविन्द प्रसाद, डॉ. संदीप चटर्जी, श्री दिनेशकुमार शुक्ल, तथा डॉ. हेमन्त कुकरैती ने कविता पाठ किया. कहानीकारों और कवियों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में जे.एन.यू. के परास्नातक और शोधार्थी एकत्रित थे. कार्यक्रम में अकादमी के सचिव डॉ. हरि सुमन बिष्ट ने स्वागत वक्तव्य में अकादमी की गतिविधियों की जानकारी दी और हिन्दी के विकास के लिए अकादमी के प्रयासों से अवगत कराया.
-0-0-0-0- हिन्दी अकादमी की ओर से जारी
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