
संतोष है कि एक महा यज्ञ पूर्ण हुआ आप सभी के अथक श्रम और सहयोग से। अंक अब आपके हाथ में है। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।
पहली कडी के साथ ही दूसरी कडी भी आकार लेना शुरु कर देती है क्योंकि सपने हों या जिन्दगी, बीतती नहीं, बस बदलती रहती हैं… तेरी-मेरी और उसकी, अपने-अपने समय की नई-नई कहानियाँ बनती और बिगड़ती। कभी यादों के संग्रहालयों में धरोहर बनकर साथ चलती है ये तो कभी-कभी संग-संग हंसती और रोती हैं । बिम्ब-प्रतिबिम्ब इन्हें पकड़ते और उकेरते, सजाते-संवारते ही तो बिता देता हैं इनसान खुद को, क्योंकि यह संघर्ष और आकांक्षाएं भी तो नैलर्गिक विवशता और विशेषता ही हैं इसके स्वभाव की । ‘शो मस्ट गो औन’ जरूरत और भूख-प्यास है इसकी। माना किसी भी श्रंखला में पहली कडी महत्व पूर्ण होती है क्योंकि यह श्रंखला को शुरू करती है, उसे आकार देती है परन्तु दूसरी कड़ी का भी महत्व कम नहीं है। क्योंकि यह भी तो उसी सजधज, जोश और लगन के साथ आगे का पूरा भार लेती है, निरंतरता और आकार देते हुए श्रंखला को संपूर्णता देती है। अब आप सोच रहे होंगे कि जरूरत ही क्या थी कि २५० कथाकारों की लघुकथाओं से सजे दो-दो ये अंक लघुकथा को समर्पित किए जाएँ और हजार के करीब लघुकथा पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत की जाएँ? इतनी लघुकथा हमारे पास आईं और इतने लेखकों ने भाग लिया, यही सिद्ध करता है कि विधा कितनी प्रचलित है और वक्त की मांग भी है। सहज और सुविधाजनक, अनंत की निरंतरता में से एक लघु पल चुनकर उसकी रोचकता के साथ या तो झकझोरती या फिर याद रह जाए ऐसी कोई बात कह जाती। बातों से बात निकलती हैं जैसे कि कहानियो से कहानियाँ, या फिर निरंतर की यह मानव जिन्दगी, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती जाती।
हो भी क्यों न, घु-से-लघु जीव-जन्तु की जिन्दगी भी निश्चय ही एक कहानी ही तो, अगर सुन सकें, समझ सकें हम। पढ़ने और समझने वाला, बयाँ करने वाला हो तो यही तो बन जाती है उस पल की कहानी या कविता या फिर तस्बीर। प्रकृति का कण-कण अपने समय-काल की बड़ी तस्बीर का अति महत्लपूर्ण और लघु बिन्दु है और उसे ही रेखांकित करती है लघुकथा। इतिहास को संजोता है समय और भविष्य में यह लघुकथा भी वक्त और समाज का दस्तावेज नहीं तो स्नैप शौट बनकर अवश्य ही उभरेंगी।
छोटी-से छोटी चीज का भी अपना महत्व है, जैसे कि बड़ी का। क्योंकि ‘जहाँ काम आवे सूंई कहा करे तलवार।’ और लघुकथा निश्चय ही आज के अति व्यस्त वक्त की पढ़ने की ललक पर लेमनचूस सी उतरती है। आज जब हम वेहद व्यस्त जीवन जी रहे हैं, लघुकथा फास्टफूड की तरह बेहद सुविधाजनक भी हैं और संतोष भी देती है।…वक्त कम, शब्द कम और दिमाग पर बोझ भी कम। मानो एक रोचक बतकही चल रही हो जाने अनजानों के बीच। एक सोचा-समझा मानसिक संवाद। किसी अन्य विधा की तरह शब्दों की कारीगरी और इंजीनियरिंग इसमें भी प्रमुख भूमिका निभाती है, बल्कि उसकी निपुणता पर अधिक ही जोर क्योंकि कम शब्दों में अधिक कहना है।
नई विधा नहीं है पर यह। हितोपदेश और जातक कथा से लेकर पंचतंत्र की कहानियाँ, अकबर बीरबल की कहानियाँ और इब्सन की कहानियाँ सभी जिन्हें Short Short Story भी कहते हैं, लघुकथा ही तो हैं। कहते हैं अंग्रेजी में पहली लघुकथा समरसेट मौम ने लिखी थी । अपने नवजात बच्चे की मौत के बाद। बेबीज शूज फौर सेल, ब्रान्ड न्यू, नेवर वोर्न। शिशु के जूते बिकने के लिए, बिल्कुल नए, पहने ही नहीं गए। बिना पहने नवजात के बड़े चाव से खरीदे जूते बिकने के लिए… पर ऐसा क्यों? क्या वजह है इसकी? जिज्ञासा और सवाल उठाती लघुकथा। कोई बतकही जब विस्तार मांगे तो कहानी बन जाती है। परन्तु जब कम शब्दों में ही अपना पूरा संदेश दे जाए तो लघुकथा। फिर कुछ तो शब्द ही पूरी कथा होते हैं । जैसे कि नफरत प्यार, मित्र दुश्मन, माँ और परिवार आदि….हर शब्द जाने कितनी यादें कितनी कहानियाँ संजोए हुए है पर इसमें भी सोच है हरेक की अपनी ही, और परिभाषा भी। हरेक व्यक्ति और घटनाओं के अपने पात्र व पात्रता हैं, पर उन्हें समझने व कहने की शैली भी अपनी-अपनी ही। लघुकथा निश्चय ही अधिक को कम शब्दों में कहने की विधा है। अनकहे की गूंज रह जाए, गुनन मनन के लिए कुछ छोड़े, तभी सफल है एक लघुकथा भी। जितनी नुकीली, चुटीली हँसाती या रुलाती उतनी ही अच्छी। जैसे सतसइया के दोहरे देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर।
हमारे इस 25/26 लघुकथा महोत्सव के दोनों अंकों में सम्मिलित रचनाकार हैं, 
भाग-१
पाँच लघुकथा
१.शैल अग्रवाल, २.जया आनंद, ३.वंदना गुप्ता, ४. बलराम अग्रवाल, ५. शेख शहजाद उस्मानी, ६. सुभाष नीरव, ७. शैलजा सक्सेना, ८ कुसुम पारीक, ९. अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, १०. अनिल शूर आजाद, ११.गोवर्धन यादव, १२. पूरन सिंह, १३. कांता राय, १४. मीनू खरे, १५. मनोरमा पाखी, १६.सुरेन्द्र कुमार अरोडा, १७. भुवनेश दशोत्तर, १८. सत्यवीर मानव, १९. अनिता रश्मि,२०. प्रेरणा गुप्ता, २१. शोभना श्याम, २२. आलोक कुमार सातपुते, २३. सतीश राठी, २४, घनश्याम मैथिल, २५. दिव्या राकेश शर्मा, २६. आरती लोकेश गोयल, २७. दिव्या माथुर, २८. राजशेखर चौबे, २९. सुरेश वाहने, ३०. मृणाल आशुतोष, ३१. संतोष श्रीवास्तव, ३२. छाया अग्रवाल, ३३. स्वाति चौधरी, ३४. मोहन राजेश कुमावत, ३५. कपिल शास्त्री, ३६. निर्मल डे, ३७. ज्योत्सना कपिल, ३८. सीमा सिंह, ३९. विभा श्रीवास्तव, ४०. चंद्रेश कुमार छतलानी, ४१. संजीव तोमर, ४२. अशोक गुजराती, ४३. कनक हरलालका, ४४. पद्मा मिश्रा, ४५. राजनंदिनी रावत, ४६. राममूरत राही, ४७. शराफत अली, ४८. वीरेन्दर वीर मेहता, ४९. अर्चना रॉय, ५०. सीमा व्यास, ५१. मधु जैन, ५२. वासुदेव वेंकट रमण, ५३. नितिन उपाध्याय, ५४. बृजेन्द्र नाथ मिश्र, ५५. साधना वैद, ५६. विनीता राउरीकर, ५७. सरस दरबारी, ५८. सुरेश वशिष्ठ, ५९. तेजवीर सिंह तेज, ६०. शैलेश ‘वीर’, ६१. अंजू खरबंदा, ६२. शर्मिला चौहान, ६३. छवि निगम, ६४.सुरेश सौरभ, ६५.महेन्द्र केसरी, ६६. विजयेन्द्र विजय, ६७. रंजना जयसवाल. ६८. मेघा राठी, ६९. विभा रश्मि. ७०. सुधा भार्गव, ७१. नीरज शर्मा, ७२. शबनम आलम, ७३. उमेश महादोशी, ७४. राजेन्द्र पुरोहित, ७५. प्रदीप कुमार शर्मा, ७६. नमिता राकेश, ७७. इरा जौहरी, ७८. रीता सिंह सर्जना, ७९. रीता रानी, ८० मधूलिका सिन्हा, ८१ मिन्नी मिश्रा,

भाग-२
पाँच लघुकथा
८२. रेणु सिंह, ८३. डाॅ रशीद ग़ौरी, ८४. मंजू शर्मा जांगिड़, ८५. मीरा जैन, ८६ संजय भारद्वाज, ८७ वर्षा गर्ग, ८८. पूजा अग्निहोत्री, ८९. नवीन कुमार, ९०. मिथलेश राकेस, ९१. शिवानी खन्ना, ९२. अनिल मकारिया, ९३. संध्या तिवारी, ९४. मंजुला एम, ९५. अखिलेश शर्मा, ९६. उषा किरण, ९७. अर्चना त्यागी, ९८. चितरंजन गोप लुकाटी, ९९. अर्चना कोचर, १००. नीलमणि, १०१. सनत, १०२. वंदना श्रीवास्तव, १०३. वीणा सिंह, १०४. सुहेल आजाद, १०५. पूनम सिंह, १०६. सपना चंद्रा, १०७. सुनील गज्जाणी, १०८. नीलिमा शर्मा, १०९. ऋता शेखर मधु, ११०. मुकेश पोपली, १११. नीरू मित्तल, ११२. उपमा शर्मा, ११३. सविता मिश्रा, ११४. वंदना स्वाभिमानी, ११५. अंशु श्री सक्सेना, ११६. कनक मोहन, ११७. अनिता मिश्रा, ११८. पूर्णिमा शर्मा, ११९. रेणु गुप्ता, १२०. पूनम झा प्रथमा, १२१. श्रुतिकीर्ति अग्रवाल, १२२. शावर भकत भवानी, १२३. रूपाली तिवारी, १२४. सविता इंद्र गुप्ता, १२५. शील निगम, १२६. पूर्णिमा सहारन, १२७. नयना आरती कनिटकर, १२८. अर्चना राय, १२९. ज्योत्सना सक्सेना, १३०. सरिता सुराणा, १३१ नीना अंद्रोता पठानिया, १३२. शील कौशिक, १३३. माधवी जैन, १३४. प्रतिभा द्विवेदी, १३५. रेणु चंद्रा, १३६. इंदु झुनझुनवाला, १३७. चंदा प्रहलादिका, १३८. भगवती सक्सेना गौड़, १३९. देवी नागरानी, १४०. अरुणा सबरवाल, १४१. ऋतु ननन पांडे, १४२. गीता चौबे गूंज, १४३. विजय विभोर, १४४. पद्मजा शर्मा, १४५. अलका प्रमोद, १४६. मंजुला श्रीवास्तव, १४७ मंजू श्रीवास्तव, १४८. कंचन अपराजिता, १४९. नीलम राकेश, १५०. रचना शर्मा, १५१. अंजना गर्ग, १५२. उमंग जौली सरीन, १५३. स्नेह बंसल, १५४. निवेदिता श्री, १५५.शितांशु अरुण, १५६.रूपम झा, १५७.सुधा आदेश, १५८. संजीव आहुजा, १५९. जिग्यासा सिंह, १६०. ज्योत्सना सिंह, १६१.अवन्ति श्रीवास्तव, १६२. नलिनी श्रीवास्तव, १६३. शिप्रा मिश्रा, १६४. प्रतिमा मणि त्रिपाठी, १६५. प्रतिभा जोशी, १६६. स्वाति कमल, १६७. रिचा वर्मा, १६८. आशमा कौल १६९. नीना छिब्बर, १७०. शिखर चन्द जैन, १७१. पायल गुप्ता , १७२. अंजना मनोज गर्ग, १७३. तेजबीर सिंह सधर, १७४. संगीता सेठी, १७५. प्रगति त्रिपाठी, १७६. संतोष सुपेकर, १७७. सुमिता शर्मा।
( तीन लघुकथा)
१७८. सीमा वर्मा, १७९. जया शर्मा प्रयंवदा, १८०. पवन शर्मा, १८१. स्नेह गोस्वामी, १८२.मनीषा सहाय सुमन, १८३. सुनीता भट्ट गोजा, १८३. १८४. १८५ १८६ १८७ ।
(दो लघुकथा)
१८८.शालिनी खन्ना, १८९. डंडा लखनवी, १९०. डिंपल लीला शर्मा, १९१. सिद्धेश्वर, १९२ रंगनाथ द्विेवेदी १९३. मुखर कविता, १९४. अन्नपूर्णा बाजपेई अनु, १९५. मंजू तिवारी कुमार १९६. सुनीता त्यागी, १९७. अभय कुमार भारती, १९८.अश्विनी के., १९९. पदम गोधा, २००. अर्विना गहलोत, २०१. अनिल कुमार जैन, २०२. पूनम वर्मा, २०३ २०४ २०५ २०६ २०७ २०८।
(एक लघुकथा)
२०९. , २१०. राम पारीक, २११. सत्य नरायण मंडल, २१२. आभा खरे, २१३. निधि मधेशिया, २१४.सुषमा गुप्ता, २१५. नीरजा कृष्णा, २१६. योगेन्द्र नाथ शुक्ल, २१७. बबिता गुप्ता, २१८. झरना मुखर्जी, २१९.रेणु शब्द मुखर, २२०. महिमा वर्मा, २२१.सीमा मधुरिमा, २२२. यूरी बौल्विकिन, २२३. अशोक जैन, २२४. अपर्णा संत सिंह, २२५. प्रवीण श्रीवास्तव प्रसून, २२६.माणक तुलसीराम गौड़, २२७. नीना मंदिलवार, २२८. विनय विक्रम सिंह, २२९. भाविनी केतन उपाध्याय, २३०. राकेश भटनागर भ्रमर, २३१. नीता सैनी, २३२.रश्मि सिंह, २३३.सुदेश वत्स, २३४. शालिनी गोयल, २३५ शिखा रमेश तिवारी, २३६. आशा श्रीवास्तव, २३७. अपर्ण गुप्ता, २३८.शशि लाहोटी, २३९.पवन शर्मा. २४०. प्रमिला वर्मा, २४१ रश्मि लहर, २४२ ज्योति अप्रतिम, २४३. हरीश कुमार सिंह, २४४ इन्दिरा चापागाई, २४५. २४६. २४७. २४८. २४९. २५०. ।
पिछले चार महीने से आप सभी साथ न रहते हुए भी पूरे समय साथ रहे। अभूतपूर्व अनुभव था यह भी। जी भरकर आप सभी को पढ़ा, इतना जाना-समझा कि अपने हो गए। यह अपनापा सुख था तो कई उलझनें भी दे गया। सभी को समेट पाना संभव नहीं था और ढूंढ पाना और भी मुश्किल। मानो लघुकथा सागर में डूब गई थी। सभी को लेने की कोशिश की है फिर भी जानती हूँ जाने अनजाने कुछ कथाकार अवश्य छूटे होगे। उनसे क्षमा प्रार्थी हूँ। २३१ रचनाकारों की हजार के करीब लघुकथा समेटे दोनों अंक अब आपके समक्ष प्रस्तुत करके एक उपलब्धि-सी महसूस कर रही हूँ। पुनः पुनः आप सभी का तहेदिल से आभार। कई बार तो आपकी रचनाओं ने अंतस को ऐसे छुआ जैसे कोई शीतल लहर छू कर गुजर जाए। कई बार चमत्कृत और विस्मृत भी हुई, और कई बार रोष व अन्याय के भाव ने भरपूर फफोला भी।
भावों का यह आवेग और आन्दोलन सुखद था और जारी रहना चाहिए। आप सभी लिखिए और खूब लिखिए। और- और अच्छी रचनाएँ निकलेंगी। अभिव्यक्ति मानव की सबसे सशक्त उपलब्धि भी है और जन्मजात अधिकार भी व हर सुख-दुख का संवाहक भी। फिर कलम को तो कैंची और तलवार जाने क्या-क्या कहा जा चुका है हमारे पुरोधाओं द्वारा। अपने इन शस्त्रों को चमकाते रहिए, सदुपयोग करिए, क्योंकि दवा और मरहम भी तो यही है। शब्द को तो बृह्म तक मानने में नहीं हिचकिचाए हमारे पूर्वज।
सभी शब्द साधक और संवेदनशील मित्रों को हृदय तल से आभार देना चाहती हूं इस संग साथ के लिए, साथ-साथ एक दुआ भी कि आपकी कलम की स्याही और चमक कभी मध्धम न हो। विशेष आभार देना चाहूंगी भाई बलराम अग्रवाल जी का और भाई शेख शहजाद उस्मानी जी का जिनका साथ एक बड़ा भरोसा और संबल रहा इस अभियान में।

शैल अग्रवाल
shailagrawal@hotmail.com
shailagrawal@gmail.com