अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की नई दोहरी पहल 


1नवम्बर कर्नाटक राज्योत्सव, जो कि सरकारो तंत्रों द्वारा मनाया जाता रहा है , उसे बेंगलौर में पहली बार अभ्युदय  अन्तर्राष्ट्रीय संस्था ने ऑल लैंग्वेज एण्ड  लिटरेचर समूह और सहयोगी साहित्यिक संस्थाओं को जोडकर बडे ही धूमधाम से मनाया। 
जिसमें सभी उपस्थित महिलाओं ने कर्नाटक के झंडे के लाल और पीले रंग के परिधान पहने।
दूसरी विशेष बात रही कवयित्री सम्मेलन।
बेंगलोर की धरती पर पहली बार सिर्फ कवयित्रियों के लिए काव्य गोष्ठी आयोजित की गई।
  स्वतंत्रता प्राप्ति के अमृत महोत्सव के तहत 75 कवयित्रियों द्वारा काव्य पाठ कराए जाने के संकल्प के तहत यहाँ बीस कवयित्रियों का काव्य पाठ कराया गया, जिसकी अगली कडियों में इसीप्रकार कवयित्रियों के काव्यपाठ का आयोजन किया जाएगा।
इसमें बेंगलौर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.श्रीनारायण समीर सिंह, डॉ.प्रेम तन्मय, कमल किशोर राजपूत के साथ-साथ पटना के वरिष्ठ साहित्यकार श्री अनिल विभाकर जी का साथा पाना मणिकांचन संयोग बना, जो कि इस आयोजन में चार चांद लगा रहा था । कार्यक्रम का आरम्भ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। सभी का स्वागत अभ्युदय कर्नाटक शाखा प्रमुख डॉ.कविता शास्त्री ने किया । डॉ आर उमा शर्मा ने कन्नड भाषा में देव वंदना की ।
तत्पश्चात अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की संस्थापक अध्यक्ष और ऑल लैंग्वेज एण्ड  लिटरेचर समूह, कर्नाटक की चेयर पर्सन डॉ इन्दु झुनझुनवाला ने मंचीय अतिथियों का परिचय देते हुए स्वागत किया।
अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय संस्था के संरक्षक
कमलकिशोर राजपूत जी ने अपने वक्तव्य मे कविता को परिभाषित करते हुए कहा कि जो दिल से निकलकर सीघे पन्नों पर उतर आए, वो कविता है।

पहले सत्र का आरम्भ करते हुए अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय राजस्थान शाखा की प्रमुख डाॅ. उषारानी राव का परिचय देते हुए उन्हें आमंत्रित किया ।
ऑल लैंग्वेज एण्ड लिटरेचर ग्रूप की वाइस चेयर पर्सन और आर्थर गिल्ड ऑफ इंडिया, बेंगलूर की चेयर पर्सन डॉ. उषा रानी राव ने विषय पर्वतन करते हुए  विस्तार से स्वतंत्रता संग्राम में कर्नाटक की भूमिका पर चर्चा की ।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मृदुभाषी विदूषी डॉ. मैथिली राव हिन्दी विभागाध्यक्ष जैन विश्वविद्यालय ने आयोजन की गरिमा को सिर्फ अपनी उपस्थिति से ही नहीं, बल्कि अपने वक्तव्य और कविताओं से भी बढ़ाते हुए सभी का दिल जीत लिया।
उन्होंने अपने वक्तव्य में बड़े ही विस्तार से स्वतंत्रता आन्दोलन में कर्नाटक की भूमिका पर प्रकाश डाला और अनेकों ऐसे नामों को उजागर किया, जो कि प्रकाश में नहीं थे।

तत्पश्चात द्वितीय सत्र का प्रारम्भ करने के लिए डॉ. कविता ने डॉ इन्दु को मंच पर आमंत्रित किया, जिन्होनें कवयित्री गोष्ठी आरम्भ करते हुए कहा कि जब अपने अहसासो को य लय बद्ध करके शब्दों में गढ़ा जाता है तो वो कविता बन जाती है।

ऑल लेडिज लीग कर्नाटक की अध्यक्ष डॉ. सुचित्रा काॅल मिश्र ने पर्यावरण पर अपनी कविता सुनाई । उनकी उपस्थित माहौल को खुशनुमा बनाने में सफल होती है ।

मोनोलोग श्रेष्ठ अदाकारा अंजना चाण्डक ने देह दान पर रचित अपनी कविता, जो उनके पिताजी के निःस्वार्थ त्याग पर आधारित थी, सुनाकर सभी श्रोताओं को निःशब्द कर दिया और एक विचार सभी के जेहन पैदा किए।

लक्ष्मी एस एच ने अयोध्या के रमा पर कर्नाटक शास्त्रिय संगीत शैली में अपनी रचना सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध किया । ज्योति तिवारी और कविता शास्त्री ने कर्नाटक की विशेषताओं का महिमामंडन अपनी कविताओं में किया तो मैसूर की नन्दिता शर्मा ने अपने मन के उद्वेलित भावों को कलमबद्ध की गई रचना से सभी को आनन्दित किया।
भूमिका श्रीवासतव ने बहुत ही कोमल भावों की अभिव्यक्ति करके सभी के दिल में अपनी जगह बनाई, डॉ इफ्फत फरीदी ने अपनी गज़ल और नज्म को छेडकर महफिल में चाँर चाँद लगाए।
श्रीलता सुरेश ने रेप सांग की तर्ज पर कविता सुनाई तो  डॉ उषा श्रीवास्तव ने राज्योत्सव के लिए लिखी गई  अपनी रचना सुनाई। संतोष भाऊवाला और पुष्पा त्रिपाठी ने नारी के मनोभावों को अपनी कविता में दर्शाया।
अन्त में मंच सचालक कर रही डॉ इन्दु ने पुरूष की ओर से एक छोटी कविता सुनाई , जिसे सराहा गया, उसके साथ ही “कितने मन है ना हमारे” एकलम्बी कविता, जिसने सभी को आह्लादित किया।

काव्य गोष्ठी के उपरान्त डॉ अनिल विभाकर  ने अपने वक्तव्य में इस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और श्रोताओं के आग्रह पर अपनी दो श्रेष्ठ रचनाऐं सुनाई , जिन्हें सुनकर लगा कि इनको सुनना बड़े ही सौभाग्य की बात है ।

संस्था के सलाहकार डॉ.प्रेम तन्मय ने अपने उद्बोधन में पूरे कार्यक्रम की समीक्षा प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने बताया कि सभी कवयित्रियों की रचनाओं ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर लिया है। राज्योत्सव के साथ कवयित्री सम्मेलन का यह प्रारूप अत्यन्त समृद्ध और महत्ता प्रदान करनेवाला है ।
अध्यक्ष के विशेष अनुरोध पर डॉ.तन्मय ने अपनी एक विशेष कविता सुनाई जो खत पर आधारित थी।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्था के सलाहकार डॉ श्रीनारायण समीर सिंह ने इस आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि बेंगलोर ही नहीं, भारत में शायद ये अपनी तरह का पहला आयोजन है, जिसमें राज्योत्सव मनाया गया और कवयित्रियों का सम्मेलन किया किया ।
इसके साथ ही चर्चा के लिए इतना सटीक विषय चुना गया।
उन्होंने यह भी कहा कि आज सभी कवयित्रियों की कविताओं को सुनकर लगा कि बेंगलूरू की धरती पर अब साहित्य का जो रूप उभरकर आरहा है वह अपने आप मे बेमिसाल हैं। इतनी अच्छी रचनाकारों को सुनकर आज बहुत ही सुखद अनुभव हो रहा है।
इसके साथ ही अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय संस्था अन्य साहित्यिक संस्थाओं के साथ मिलकर साहित्य के सही अर्थ को सार्थकता प्रदान कर रही है, इसके लिए साधुवाद पूरी टीम को।
कार्यक्रम की समीक्षा के साथ -साथ आपने मुख्य विषय पर भी अपनी बात रखते हुए सभी का ज्ञानवर्धन किया।
 डॉ. कविता शास्त्री और सहायक प्रभारी डॉ उमा शर्मा ने कर्नाटक की संस्कृति को उजागर करने के लिए एक बहुत ही सुन्दर झांकी सजाई, जिसकी सभी ने प्रशंसा  की।
सभी को शाल, दुपट्टा, प्रशस्ति-पत्र और दीपावली की मिठाई के साथ सम्मानित किया गया।
अल्पाहार के साथ आयोजन का समापन किया गया ।
करीब तीन धण्टे से अधिक चलनेवाले इस आयोजन की विशेषता यह रही की सभी मंत्रमुग्ध से बैठे एक-दूसरे को सुनते और सराहते रहे और इसतरह के आयोजन होते रहने चाहिए ,ऐसी इच्छा जाहिर की।
इन्दु झुनझुनवाला

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