बचपन की मोहक दुनिया और प्रकाश मनु की 151 बाल कविताएं
बचपन की सतरंगी निराली दुनिया जहां कल्पना के पंखों पर बैठ सपने सजते हैं संवरते हैं और एक नया सृजन संसार बसाते हैं। परंतु उनकी दुनिया में प्रवेश पाना सहज महीं होता।हम स्वयं बच्चे बनकर ही उनके मन को सपनों को समझ सकते हैं। ऐसे.ही विलक्षण शिशु मन सी सरलता और मासूमियत साथ लिए यशस्वी बाल कवि आदरणीय प्रकाश मनु.सर की सृजित पुस्तक प्रकाश मनु.की 151 बाल कविताए पढीं तो उत्सुकता और बाल सुलभ चपलता के साथ बचपन की दुनिया में ही पहुंच गई। जहां खेल थे खिलौने तितली परियां बाग बगीचे मोर पंछियों का कलरव क्या नहीं था उस छोटी सी स्वप्न मंजूषा में। वे बालमन के अद्भुत चितेरे हैं। उन्हें पढते हुए यह बिल्कुल प्रतीत नहीं होता कि ये कविताए किसी परिपक्व सृजन एवं प्रबुद्ध व्यक्तित्व वाले कवि ने लिखी होंगी।
पुस्तक की भूमिका में वरिष्ठ साहित्यकार डा शेरजंग गर्ग लिखते हैं–प्रकाश मनु. में एक जीवंत भाषा,लयात्मक शैली और बालसुलभ सरलता के कारण उनकी बाल कविताए अत्यंत श्रेष्ठ हो गई हैं।
सचमुच बच्चों के लिए बाल कविताओं का अत्यंत महत्व है। अपनी सहजता और सरलता के साथ अभिव्यक्त होने वाली कविताए मित्र की तरह ही बच्चों के मन में रचबस जाती हैं।कविता बच्चों को ध्वनियों और लय से परिचित कराती है, जो उन्हें भाषा सीखने और पढ़ने के कौशल को विकसित करने में मदद करता है। बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करती कविताए कितनी सहजता से अपनी बात कह जाती हैं आश्चर्य होता है।
पढ लिखकर हम निकलें आगे ,
कदम बढें बस आगे आगे।
नये समय को पहचानें हम
,अपनी क्षमता को जानें हम।
फिर बदले बदले भारत की झांकी
दुनिया को दिखलायें।
कविता बच्चों को विभिन्न दुनियाओं और पात्रों का पता लगाने के लिए प्रेरित करती है जिससे उनकी कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है। जैसे इस कविता में धूप का मानवीकरण अत्यंत सुंदर और मोहक है जैसे मानो कोई चित्र सामने साकार हो।रहा हो।
उजले हंसो की पांचों सी
,तुतले मुन्ना की बातों सी ,
दिल को सच कितना भाती.है
,यह जाडे की धूप।
जैसे एक.नन्हा खरगोश,
उछल.रहा.ले मन.में जोश,
इधर घूमती,उधर घूमती,
झट छज्जे पर चढ जाती है,
यह जाडे की धूप।
प्रकाश मनु.सर की ये बाल कविताए बच्चों की कल्पना और रचनात्मकता को भी बखूबी व्यक्त करने में सफल हैं। जिन बातों को परिवार के बडे सदस्य समझा नहीं.पाते वहीं सुर लय में बंधी हुई ये सरल रचनाए आसानी से कह जाती हैं–
निम्न कविता को पढते हुए मेरे नेत्रो के सम्मुख भारत माता का चित्र बिंब बन रहा था। हृदय भावभरा और अधरों पर सहज ही वंदे मातरम गीत गुंजित होने लगा।
जिसने सूरज चांद बनाकर,
सबसे सुंदर धरा बनाई,
रंग बिरंगे फूल खिलाये,
फिर उसमें खुशबू महकाई।
सुंदर सागर सुंदर नदियां
पर्वत खूब विशाल बनाये,
चींटी हाथी हिरन तितलियां,
तरह तरह के जीवन बनाये।
.एक अद्भुत भावनात्मक संबंध मन और जीवन के साथ आत्मसात होता हुआ बच्चों की चेतना को जीवन्तता प्रदान करता है। सामाजिक विकास के लिए जागरुक करती प्रकाश मनु सर की ये कविताए बच्चों की भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करती है और सहानुभूति विकसित करती है। यह उन्हें सामाजिक मूल्यों और सही-गलत की समझ भी सिखाती है-
रावण की थी सोने की मानी लंका
लंका में बजता था रावण का डंका।
,ऐंठे ऐंठे दुर्ग कांग्रेस लंका के,
आये प्रभु तो एक एक कर ढहते.हैः।
दीवाली के दीये यही तो कहते हैं।
यह कविता बच्चों को सहज ही सिखाती है कि जो अहंकार करता है वह भी इसी तरह ढह जाता है, उसका.विनाश हो जाता है। बहुत बहुत सुंदर सृजन। ऐसी कविताए बच्चों के मन में अपना घर बना लेती हैं। उनका लगाव कविता के पात्रों और घटनाओं कै साथ जुड़ाव जाता है।
चिट्ठी का संदेश नामक रचना में चिट्ठी या पत्र लेखन कितना जरुरी.है ,जहां मन की बातें सहज ही कही सुनी जा सकती हैं ,बच्चों को.आसानी से सिखा देती.है यह रचना।
चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी है घर का अखबार !
इसमें सुख-दुख की हैं बातें प्यार भरी इसमें सौगातें,
कितने दिन, कितनी ही रातें –
तय कर आई मीलों पार
यह आई मम्मी की चिट्ठी
लिखा उन्होंने-प्यारी किट्टी,
मेहनत से तुम पढ़ना बेटी,
पढ़-लिखकर होगी होशियार
यह कविता बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण है! इसमें चिट्ठी के माध्यम से परिवार के प्यार और स्नेह को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। चिट्ठी में मम्मी का प्यार भरा संदेश है, पापा का प्यार भरा पोस्टकार्ड है, और चाचा का छोटा सा कागज है जिसमें नए-नए संदेश होते हैं।
कोई भी चिट्ठी घर का अखबार होती है, जिसमें सुख-दुख की बातें होती हैं और प्यार भरे उपहारों सा आत्मिक स्नेह होता हैं। कविता में बच्चे की खुशी और उत्साह को बहुत ही सुंदर तरीके से दर्शाया गया है जब वह चिट्ठी पढ़ता है और अपने परिवार के प्यार को महसूस करता है। इस.बाल रचना की भाषा बहुत ही सरल और सुंदर है, जो बच्चों को बहुत पसंद आएगी। कविता का यह सुखद संदेश है कि परिवार के साथ जुड़ने और उनके प्यार को महसूस करने में कितनी खुशी होती है।
नन्ही चुलबुल क्या खाएगी?
एक पराँठा आलू का !
मूली वाला गरम पराँठा
यह है मेरे भालू का।
और पराँठा यह पालक का
शायद खाएँगे पापा जी,
भैया खाएँगे मेथी का
संग-संग आलू की भाजी ।
मम्मी-मम्मी, अब तुम बोलो
खाओगी ना गरम पराँठा,
गोभी वाला मैं सेंकूँगा
खाना हँस-हँस नरम पराँठा ।
यह कविता डॉ. प्रकाश मनु की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें उन्होंने बच्चों के मन की बात को एक कुशल मनोवैज्ञानिक की तरह बहुत ही सुंदर तरीके से गढा है। एक बच्चा अपनी मम्मी से कह रहा है कि वह अलग-अलग तरह के पराँठे बना रहा है, जैसे कि आलू का, मूली वाला, पालक का, मेथी का, और गोभी वाला।
वह अपनी मम्मी को बुलाकर कहता है कि वह गोभी वाला पराँठा खाएगी, और वह उसे सेंकेगा। कविता में बच्चे की खुशी और उत्साह को बहुत ही सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। बच्चे के मन में कितनी खुशी और उत्साह होता है जब वह अपने परिवार के लिए कुछ करता है। बच्चोंके मन में अपने माता पिता और परिवार के प्रति प्यार और अपनेपन की भावना विकसित होती है।। यह कविता उन्हें सिखाती है कि परिवार के साथ मिलकर खाना खाने में कितनी खुशी होती है, और बच्चों के मन में कितना प्यार और स्नेह होता है।
नैतिकता और चरित्र निर्माण की दिशा में भी अच्छी बाल कविताएं बच्चों में अच्छे संस्कार डालकर उनके चरित्र को मजबूत करती हैं, जिससे वे अच्छे नागरिक बनते हैं।: बाल कविताओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है बल्कि ये बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी योगदान करती हैं। जिसमें शिक्षा, नैतिकता खेल और मनोरंजन भी शामिल हैं।
बिल्ली यह बोली चूहे से ,
आओ खेलें खेल.।
प्यारा क्रिकेट खेल निराला,
मन का होगा.मेल।हिन्दी साहित्य हो.या.वैश्विक बाल साहित्य लेखन की दिशा में बहुत कम लिखा गया है।और जो.साहित्य उपलब्ध भी है उसमे बौद्धिक परिपक्वता की झलक मिलती है।परंतु पद्म लेखन में आदरणीय प्रकाश मनु.सर को पढना एक सुखद अनुभूति है।उनका कवि मन स्वयम एक शिशु बनकर.उनकी हर.कल्पना, हर भावना सभी के.साथ साथ खेलता है,हंसता है,प्रकृति के.साथ गुनगुनाता भी है.और बच्चों की दुनिया में डूबकर जब सृजन करता है और सीखता भी है। उनकी कृतियाँ बाल साहित्य की
बाल मनोविज्ञाम की सर्वश्रेष्ठ कहानीः ईदगाह-प्रेमचन्द
कलम के जादूगर, मुंशी प्रेमचन्द की कहानियां हमारे आसपास और दैनंदिन जीवन की हर छोटी-बड़ी घटनाओं से प्रेरित होती है,उनको पढ़ते समय यही प्रतीत होता है जैसे यह घटना हमारी आंखों के सामने घटित हो रही है अथवा हमारे परिवेश से ही जुड़ी हुई है, विशेष रूप से बाल मनोविज्ञान से जुड़ी कहानियां,अपनी संवेदना, मार्मिकता, और भावनात्मक चित्रण में अपूर्व होती है और मन को उद्वेलित कर जाती है, इन्हीं कालजयी कहानियों में ईदगाह कहानी मुझे बेहद पसंद हैं, जहां बच्चों की दुनिया, उनके सपने,उनकी कल्पनाएं सजीव हो साकार रुप ले लेती है,,ईद पर जुड़ने वाले मेले का मनोहारी वर्णन हो या नन्हें हामिद का अंतर्द्वंद्व,मन को छू जाता है,
बाल मनोविज्ञान पर आधारित ‘मुंशी प्रेमचंद’ द्वारा लिखी गई “ईदगाह” कहानी एक अप्रतिम कहानी है जो बाल मन को गहनता से दर्शाती है। इस कहानी को पढ़कर ज्ञात होता है कि परिस्थितियां उम्र नहीं देखती और एक छोटा सा बालक भी विषम परिस्थितियों में समय से पहले परिपक्व हो जाता है,,कहानी में हामिद, जो एक मात्र 8 वर्ष का बालक है, वह एक परिपक्व व्यक्ति की भांति किसी तरह समझदारी का परिचय देता है, और अपने दोस्तों के द्वारा तरह तरह के खिलौने खरीदे जाने पर या चटपटी चीजें खाने का लालच देने पर विचलित तो होता है, पर मन पर संयम रखता है, और अनेक बहाने बना कर मन को समझा लेता है, प्रेमचंद ने इसी बात को रोचकता से दर्शाया है,, कहानी का मुख्य पात्र हामिद और उसकी दादी अमीना है,हामिद के माता-पिता इस संसार में नही हैं। वो अपनी बूढ़ी दादी के साथ रहता है,, वे बहुत गरीब हैं, उसकी दादी छोटा-मोटा काम करके किसी तरह अपना और हामिद का भरण पोषण करती है,, वो हामिद की सारी इच्छाएं पूरी नहीं कर पाती,,
ईद का त्यौहार आता है, सब लोग मेले में घूमने जा रहे हैं,हामिद भी मेले में जाने के लिए उत्साहित है,,हामिद की दादी किसी तरह थोड़े बहुत पैसे जोड़कर तीन आने हामिद को देती है, ताकि वो मेला घूम आये,, बूढ़ी दादी को लगता है कि बेचारे हामिद के दोस्त मेले में मज़े करेंगे तो वह तरसेगा,वह अपनी मेहनत के सारे पैसे हामिद को दे देती है, हामिद अन्य बच्चों के साथ मेला जाता है,,यहां सब बच्चे अपने मां-बाप द्वारा दिए पैसों से खिलौने, मिठाई आदि खरीदते है, लेकिन वह अपने मन पर नियंत्रण कर ये सब नही खरीदता। वह मेले में एक जरूरी चीज लेता है,, वह जरूरी चीज है रसोई घर में काम आने वाला चिमटा,!!हामिद देखता था कि कैसे उसकी दादी के हाथ रोटी बनाते समय जल जाते थे, क्योंकि उसके पास चिमटा नहीं था, हामिद को अपनी बूढ़ी दादी का यह कष्ट बराबर याद रहा, और उसने अपनी इच्छाओं को तिलांजलि देते हुए अपनी बूढ़ी दादी के लिए एक उपयोगी वस्तु खरीदी.,वह खिलौने के आगे हारा नहीं, गाने पीने की चीजें देखकर ललचाया नहीं,बस केवल एक चीज याद रही,वह था कि दादी की उंगलियां जल जाती है, उसकी पीड़ा और दर्द को उस छोटे से बच्चे ने महसूस किया, और चिमटा खरीद लिया, और उसे बंदूक की तरह कंधे पर उठाकर बड़ी शान के साथ चल रहा था, उसकी कल्पना में वह चिमटा कभी बंदूक बन जाता कभी सिपाही जी का डंडा,तो कभी संगीत का साथी,, फिर दादी के लिए चिमटा तो था ही,,बस फिर क्या था, पांसा ही पलट गया,अब सारे दोस्तों को अपने खिलौने हामिद के चिमटे के आगे फीके लगने लगे,सब उसे छू छूकर देखना चाहते थे,,
कहानी का अंत बेहद मार्मिक और भावविभोर कर देता है,जब बूढ़ी अमीना पहले तो चिमटा देखकर नाराज होती है, फिर जार जार रोती हुई हामिद को गले लगा लेती है, यहां बूढी दादी हामिद बन गई थी और नन्हा हामिद अमीना,जो उसे चुप करा रहा था,यह है एक संवेदनशील कथाकार की जादूगरी,कलम के सिपाही की अभिव्यक्ति जो पाठक के मन के भीतर प्रवेश कर सकती हैं,,
यह कहानी हामिद की मात्र 8 वर्ष की आयु में परिपक्वता को दर्शाती है, उसके अंदर की संवेदनशीलता को दर्शाती है. इसका कारण यह था कि समय और निर्धनता ने हामिद को अपनी उम्र के बच्चों से ज्यादा समझदार बना दिया था, वो समय से पहले ही परिपक्व हो चुका था, संवेदनशील बन चुका था.
हामिद के रूप में एक बच्चे के मन को भली-भांति पढ़ने और बाल मनोविज्ञान की संवेदनशीलता को सार्थक रूप से प्रस्तुत करने में लेखक प्रेमचंद पूरी तरह सफल रहे हैं.
–पद्मा मिश्रा जमशेदपुर झारखंड

शिक्षा-एम ए, हिंदी,प्रथम श्रेणी,,( पांचवां स्थान प्राप्त)
व्याख्याता पात्रता प्राप्त (यू जी सी द्वारा)
रूचि-लेखन, अध्ययन
, स्वतंत्र अध्यापन
संप्रति–गृहिणी
लेखन विधा–कविता, कहानी,लेख, संस्मरण, पुस्तक समीक्षा, यात्रा संस्मरण
अनेक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय,राष्ट्रीय,पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित
आकाश वाणी से नियमित रचनाओं का प्रसारण
पुस्तकें प्रकाशित–कहानी संग्रह*सांझ का सूरज*, कविता संग्रह–*सपनों के वातायन*
बालकाव्य संग्रह–*नन्हे सपने*
उपन्यास–चंदन माटी
अन्य पुस्तकें सृजन रत,,(प्रकाशन की प्रतीक्षा में
सम्मान एवं पुरस्कार–बाल साहित्य परिषद द्वारा*जयप्रकाश भारती*सम्मान
डा नरेंद्र कोहली द्वारा प्रदत्त–*अक्षर कुंभ अभिनंदन* सम्मान,
रांची की साहित्यिक संस्था ने,*किशोरी देवी साहित्य सम्मान प्रदान किया,
अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था*विश्व हिंदी संस्थान कनाडा के द्वारा**विश्व हिंदी कथा शिल्पी *सम्मान प्रदान किया गया,