भाषा और भूगोल की सीमाएँ तोड़ती, विश्व के उत्कृष्ट और सारगर्भित ( प्राचीन से अधुधिनिकतम) साहित्य को आपतक पहुंचाती लेखनी द्विभाषीय ( हिन्दी और अंग्रेजी की) मासिक ई. पत्रिका है जो कि इंगलैंड से निकलती है। वैचारिक व सांस्कृतिक धरोहर को संजोती इस पत्रिका का ध्येय एक सी सोच वालों के लिए साझा मंच (सृजन धर्मियों और साहित्य व कला प्रेमियों को प्रेरित करना व जोड़ना) तो है ही, नई पीढ़ी को इस बहुमूल्य निधि से अवगत कराना...रुचि पैदा करना भी है।
I am a monthly e zine in hindi and english language published monthly from United Kingdom...A magzine of finest contemporary and classical literature of the world! An attempt to bring all literature and poetry lovers on the one plateform.
‘११ अक्तूबर २०१५ ‘इंग्लॅण्ड’ में ‘बर्मिंघम’ शहर के ‘गीता भवन’ में श्रीमती शैल अग्रवाल जी की इ पत्रिका ‘लेखनी’ का ‘लेखनी सानिध्य ‘ का वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जहाँ ब्रिटेन के गणमान्य साहित्य-प्रेमी उपस्थित […]
साहित्य जगत के, मेरे कुछ वरिष्ठ जन यह भूल रहे हैं कि आज से 61 वर्ष पूर्व जिस साहित्य अकादमी की स्थापना ही केन्द्रीय सरकार द्वारा की गई और इतना ही नहीं, उसका सारा विधान […]
हिंदी सांस में है, पानी में, पहाड़ में, खेत में, सेल्फी में, शहर में, देहात में। इसलिए जाहिर है कि हिंदी की धमक मीडिया में भी है। 90 के दशक में जब निजी मीडिया भारत […]
नहीं रहे उत्कट जीवट के धनी बालशौरि रेड्डी (हिंदी-तेलुगु का एक सुदृढ़ सेतु गिर गया) यह अत्यंत दुखद समाचार है कि तेलुगु और हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, ‘चंदामामा’ के पूर्व संपादक और बालसाहित्यकार, उत्कट जीवट […]
नया इंडिया, 14 सितंबर 2015 विश्व-हिंदी : मूर्खतापूर्ण बातें डॉ वेदप्रताप वैदिक भोपाल में हुए 10 वें विश्व हिंदी सम्मेलन से बहुत आशाएं थीं| विदेशों में होनेवाले विश्व हिंदी सम्मेलनों से इतनी आशा कभी नहीं […]
बाइसवीं पावस व्याख्यानमालाः एक रपट -गोवर्धन यादव साहित्य का महातीर्थ हिन्दी भवन भोपाल. हिन्दी भवन भोपाल में आयोजित बाईसवीं पावस व्याख्यानमाला में, हिन्दी साहित्य के गौरव कवि प्रदीप एवं डा.शिवमंगल सिंह “सुमन” की जन्मशताब्दी […]
“अँखियाँ पानी पानी ” हिन्दी साहित्य जगत में भक्ति की इकलौती कृति है , ये शब्द थे पूर्व शिक्षा मंत्री एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा . नरेन्द्र कुमार सिंह गौर के । उन्होंने […]
“दुःख सन्तोष श्रीवास्तव की कहानियों का स्थाई भाव है ।उन्होंने दुःख को जिया है और ज़िन्दगी के कई रंग इनकी कहानियों में शिद्दत के साथ महसूस किये जा सकते हैं ये बातें सूरज प्रकाश […]
खुला मंच में साहित्य, शायरी, एवं संगीत की शानदार प्रस्तुति………. तुमभी एवं यात्री प्रस्तुत खुला मंच-4 का आयोजन 6 दिसम्बर 2014 को हुआ जिसमें एक से एक बेहतरीन कलाकारों, गायकों, कवियों, कलाकारों एवं संगीतकारों ने […]