About Lekhni
भाषा और भूगोल की सीमाएँ तोड़ती, विश्व के उत्कृष्ट और सारगर्भित ( प्राचीन से अधुधिनिकतम) साहित्य को आपतक पहुंचाती लेखनी द्विभाषीय ( हिन्दी और अंग्रेजी की) मासिक ई. पत्रिका है जो कि इंगलैंड से निकलती है। वैचारिक व सांस्कृतिक धरोहर को संजोती इस पत्रिका का ध्येय एक सी सोच वालों के लिए साझा मंच (सृजन धर्मियों और साहित्य व कला प्रेमियों को प्रेरित करना व जोड़ना) तो है ही, नई पीढ़ी को इस बहुमूल्य निधि से अवगत कराना...रुचि पैदा करना भी है। I am a monthly e zine in hindi and english language published monthly from United Kingdom...A magzine of finest contemporary and classical literature of the world! An attempt to bring all literature and poetry lovers on the one plateform.
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लेखनी/Lekhni

विनम्र श्रद्धांजलि

30/11/2017 0

हिंदी के यशस्वी कवि कुंवर नारायण गत 15 नवंबर को 90 वर्ष की आयु में साहित्याकाश को अंधेरा करते हुए अस्त हो गए। हाल ही में उनके लिए आयोजित एक शोक सभा में अशोक वाजपेयी […]

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लेखनी/Lekhni

Indologist Award to Professor Hiroshi Marui of Japan

28/11/2017 0

The President of India, Shri Ram Nath Kovind, conferred the 3rd ICCR Distinguished Indologist Award on Professor Hiroshi Marui of Japan today (November 27, 2017) at a function held at Rashtrapati Bhavan. Speaking on the […]

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लेखनी/Lekhni

क्या विश्व महाविनाश के लिए तैयार हैः डॉ. नीलम महेन्द्र

19/11/2017 0

अमेरीकी विरोध के बावजूद उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे हायड्रोजन बम परीक्षण के परिणाम स्वरूप ट्रम्प और किम जोंग की जुबानी जंग लगातार आक्रामक होती जा रही है। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो […]

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लेखनी/Lekhni

मैंने देखी पद्मावती: सच्चाई क्या है ?-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

19/11/2017 0

फिल्म पद्मावती को लेकर आजकल जैसा बवाल मच रहा है, अफवाहों का बाजार जैसे गर्म हुआ है, वैसा पहले किसी भी फिल्म के बारे में सुनने में नहीं आया। बवाल मचने का कारण भी है। […]

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लेखनी/Lekhni

काश कि रेल बजट तकनीक केन्द्रित होताः नीलम महेन्द्र

21/08/2017 0

बेहतर होता कि हमारी सरकारें देश के नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझतीं और सरकारी खजाने का प्रयोग  दुर्घटना होने के बाद दिए जाने वाले मुआवजे और जांचो में खर्च करने के बजाय उस […]

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लेखनी/Lekhni

यह कैसी व्यवस्था है? -नीलम महेन्द्र

08/08/2017 0

क्यों हम बेटियों को बचाएँ “मुझे मत पढ़ाओ , मुझे मत बचाओ,, मेरी इज्जत अगर नहीं कर सकते ,तो मुझे इस दुनिया में ही मत लाओ मत पूजो मुझे देवी बनाकर तुम ,मत कन्या रूप […]

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