दो लघुकथाएँः प्राण शर्मा/ लेखनी-मार्च-अप्रैल 18

गर्माहट

सर्दी का प्रकोप था। बूढ़े शरीर को ठण्ड कुछ ज़्यादा ही लगती है। 75 वर्षीया
सीता देवी भी ठण्ड के मारे कांप रही थी और रिजाई में दुबकी पड़ी थी।
रिजाई में ही मुँह ढके – ढके वह ठिठुरती आवाज़ में बेटे से बोली – ” एक और
रिजाई मुझ पर डाल दे और और गर्म पानी की बोतल भी लेता आना। शरीर
ठण्डाठार है। ”
इतने में बेटा बोला – ” अम्मा , देखिये कौन आया है ? ”
” कौन आया है ? ”
” आप रिजाई हटा कर ख़ुद ही देखिये। ”
” बता न कौन आया है ? ठण्डीठार हूँ। ”
” आपका पोता सिंगापूर से लौट आया है। ”
अम्मा ने तुरंत रिजाई हटा कर देखा। सामने पोता ही था। उसने झट रिजाई
को परे फेंक दिया और फुर्ती से उठ कर पोते को अपनी बाँहों में भर लिया।
अम्मा की सारी ठण्ड काफ़ूर हो चुकी थी।

अभिलाषा

घर में ख़बर फैलते ही सबके चेहरों पर प्रसन्नता की लहर दौड़ गयी कि छोटी
बहु पेट से है। चार साल के बाद सबकी अभिलाषा पूरी हुयी थी।
दादा जी तुरंत तैयार हुए और बेटे और बहु की जन्म पत्रियाँ ले कर नगर के
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य के पास पहुँच गए।
दादा जी के अलावा घर में आठ सदस्य हैं – दादी , दो बेटे , दो बहुएँ , दो
बेटियाँ और एक पोता।
सभी दादा जी की बेचैनी से प्रतीक्षा कर रहे थे। बेटियाँ तो उतावली सी पाँच –
पाँच के बाद उनकी राह देख आती थीं।
दादा जी का प्रवेश हुआ। उत्सुकता में सभी ने उनको घेर लिया। सभी एक
स्वर में बोले – ” बताइये , ज्योतिषी ने क्या कहा है ? ”
दादा जी बोले – ” बताता हूँ ;थका – हारा हूँ , पहले कुछ पानी – वानी तो पी लूँ। ”
” पानी – वानी बाद में पीयें , पहले बताइये कि ज्योतिषी ने क्या कहा है ? ”
” आप सब बताइये , ज्योतिषी ने क्या कहा होगा ? ” कन्या का योग या —-
” पुत्र का योग कहा होगा। ”
” कन्या का ——-”
कन्या सुनते ही सबके चेहरे लटक गए।
” चेहरे क्या लटकाते हैं
? कन्या का नहीं पुत्र का योग है। ”
” सच ? ”
” सच। ”
” हुर्रे। ” झूमते हुए सबने दादा जी को उठा लिया।