
तलाकशुदा
मेहुल,मोहिनी, परस और भव्या सभी के मुख मंडल पर परम तृप्ति के भाव तैर रहे थे ; तो इधर इरा की आँखों में भी संतोष देखा जा सकता था !
दाल मखनी ,शाही पनीर , मिक्स वेज, मखाना लज़ीज़,मीठी फिरनी, रायता बूँदी ,जीरा आलू विद मटर , नवरत्न पुलाव , चटनी, पापड़ ,मूली के लच्छे… और खीरे की बतख… टेबल डेकोरेशन ऐसी कि देखकर मास्टर सेफ़ भी दाँतो तले उंगली दबा लें ।
मेज पर चपातियां रखने की भी जगह न थी यूं भी इरा की आदत है एक-एक और गरमागरम चपाती परोसने की।
एमाइलेज,प्रोटीज,लाइपेज़,आदि सारे के सारे पाचक एंजाइम उनके उदर में धमाचौकड़ी मचा रहे थे जिसके भाव लाख छुपाने पर भी उन सबके चेहरे पर उतर आए थे,यह देख इरा की आँखों में ममत्व छलक उठा और उसने तुरंत गैस स्विच ऑन कर तवा चढ़ा दिया, लगा जैसे उसके प्रेम की ऊष्मा उस निष्प्राण तवे को अपने परस से गरमा गयी थी ।
सबने खूब चटखारे लेकर खाया ।यह सचमुच एक शानदार दोपहर थी शरद के प्रेम माह की गुनगुनी धूप में लिपटी हुई।
जो लगभग एक दशक बाद उसके जीवन में हुई थी।
यूं तो उसकी आंखों के दो जुगनू सूरज होने का माद्दा रखते थे जो घनेरी अमावस को नित पूनम किए देते थे और वो अपनी ही आभा से दैदीप्यमान ज्योतिपुंज – सी हुई जाती थी।
कुछ दिन पहले ही तो पुलक- पुलक कर बताया था इरा ने कि मेहुल जी मोहिनी संग लंच पर आ रहे हैं।
मैं सुनकर आश्चर्य मिश्रित सुखद अहसास से भर गई थी।
सिद्धांतों और परंपराओं पर अडिग रहने वाली ये स्त्री भी कितनी अनूठी है न!
प्रेम में ऐसे घुली जाती है जैसे पानी में नमक ।
विदेशी संस्कृति की बात दीगर है वरना अपने यहाँ कोई भूतपूर्व पति को वर्तमान पत्नी सहित स्नेह भोज पर आमंत्रित करता है भला? बिछड़ने से पहले वापसी के सब पुल जला दिए जाते हैं लानतें – मलानते और चरित्रहीनता के आरोप एक दूसरे के सिर मढ़ते हैं सो अलग।
पर इधर ऐसा कुछ न था सब कुछ अति सहजता से हो गया था।
भव्या ने लाख कोशिश की कि खाने के बाद बर्तन समेट दे, पर इरा के आगे कहाँ किसी की चलती है!
ओ सी डी के साथ कोरोना का होना बिलकुल ऐसा है जैसे करेला और नीम चढ़ा।
साफ़- सफाई को लेकर उसकी सतर्कता चिकित्सकीय सलाह लेने की सीमा तक बढ़ गई है और यह बात परिवार में किसी से भी छिपी नहीं है।
बरतन समेटते हुए इरा ने मेहुल और मोहिनी को सम्बोधित करते हुए कहा कि वे चाहें तो बगल वाले कमरे में आराम किया जा सकता है।
ये उनके बेटे परस का कमरा है।
मेहुल नज़र भर उनको देखते हैं, तो क्या इरा को आज भी याद है खाने के बाद मेरी आराम करने की आदत।
परन्तु वे प्रत्यक्ष में कुछ न कहकर अभिभूत से यंत्रवत से कमरे की ओर बढ़ जातें हैं।
विवाह विच्छेद के बाद भी सारी जिम्मेदारियों को बख़ूबी निभाने की कुशलता ने मेहुल को उनका मुरीद बना दिया है।
ज़रूरत पड़ने पर इरा यथोचित सलाह देने में भी कोताही नहीं करती और तो और आर्यसमाज के नियमों को मानने के बावजूद भी सास-ससुर का श्राद्ध पूर्ण श्रद्धा से करती हैं
लगता है जैसे उन्होंने परिवार से नहीं बस जूठन से तलाक लिया।
ओ सी डी है न !… सोचते-सोचते मेहुल की झप- झप करती आँखें झपकी लेने लगी।

” वो तुम न थी”
हम लोग कैफेटेरिया में घुसे तो सामने की टेबल पर बैठे एक सज्जन पर दृष्टि ठहर गई सुंदर, सौम्य, शांत, सरल चेहरे पर शिशुओं जैसी स्निग्धता हलकी घुंघराली दाढ़ी और वैसे ही बाल कुल जमा एक मनहर छवि,चेहरे का आभामंडल भी देखते ही बनता था।
निश्चित रूप से वे या तो कोई कलाकार थे या दार्शनिक शून्य में अपलक निहारते। मानो सारे रहस्यों से आज ही पर्दा उठा देंगे एक बार मन हुआ कि एक इंस्टेंट फोटो ले लिया जाए पर यह शिष्टाचार की श्रेणी में न आता था ।
कुछ देर बाद कोने की मेज़ पर एक सांवली ,सलोनी युवती आकर बैठ गई अब उन दार्शनिक सरीखे दिखने वाले सज्जन की दृष्टि शून्य से हटकर उस सलोनी युवती पर आकर ठहर गई …अपलक अनथक।
शायद वे त्राटक क्रिया के अनुभवी अभ्यासी भी थे। कुछ देर बाद वह युवती तेज़-तेज़ चलकर आई और लगी बरसने दार्शनिक महोदय पर-
“ऐ मिस्टर !”
“क्यों घूर रहे हो ?”
“इतनी देर से क्या देखे जा रहे हो? ”
” ऐटीकेटस् नाम की भी कोई चीज़ होती है आखिर ! ”
ब्लैब -ब्लैब… !
लड़की थी या राजधानी एक्सप्रेस!
चार सौ शब्द प्रति मिनट की रफ्तार।
दार्शनिक महोदय ने दृष्टि ऊपर उठाकर शांत और सधे शब्दों में कहा-
‘ वो तुम न थी कल्याणी’
मैं कौने में बैठी जिस लड़की को देख रहा था | वह निहायत सौम्य, सरल, शांत ,सलोनी और सहृदय दिख रही थी
लड़की चिल्लाई -, ”वो मैं ही थी ”
”मैं ही बैठी थी वहाँ”
”न! ” वो तुम न थी ! यह कहते हुए उन सज्जन ने एक गहरी साँस छोड़ी और आंखें बंद कर ली ।
लड़की कुछ सेकेंड बड़बडाई और फिर पैर पटकती हुई चली गई ।
सुमन युगल
परिचय
सुमन सिंह चंदेल
(पेन नेम: सुमन युगल
पति – श्री युगल किशोर भारती
जन्म – 16 अप्रैल 1976
जन्मस्थान – मुज़फ़्फ़रनगर
शिक्षा – एम. ए
संप्रति – शिक्षिका, स्वतंत्र लेखन,
अभिरुचि – पाककला, पोषाक, सज्जा।
प्रकाशित / अप्रकाशित –
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित ।
संपर्क सूत्र – द्वारा श्री युगल किशोर भारती
252 लद्दावाला, कम्बल वाली गली निकट चन्द्रा सिनेमा
पिन कोड- 251001
मोबाइल – 8126228658