ख़ाक़ जिया तू ज़िंदगी, अगर न छानी ख़ाक़।
काँटे बिना गुलाब की, क्या शेख़ी क्या धाक।।

छोटा हूँ तो क्या हुआ, जैसे आँसू एक।
सागर जैसा स्वाद है, तू चखकर तो देख।।

जुगनू बोला चाँद से, उलझ न यूँ बेकार।
मैंने अपनी रौशनी, पाई नहीं उधार।।

बेशक़ होगा शाह वो, मैं अलमस्त फ़क़ीर।
उसका पीर कुबेर है, मेरा पीर कबीर।।

पिंजरे से लड़ते हुए, टूटे हैं जो पंख।
यही बनेंगे एक दिन, आज़ादी के शंख।।

ख़ुद में ही जब है ख़ुदा, यहाँ-वहाँ क्यों जाय।
अपनी पत्तल छोड़ कर, तू जूठन क्यों खाय।।

जब से फेंके तोड़ कर, गंडे औ’ तावीज़।
धूप-हवा आने लगी, मेरी भी दहलीज़।।

धैर्य छूटने जब लगे, धैर्य धरो कुछ और।
सच्चाई की राह में, और न दूजी ठौर।।

वो निखरा जिसने सहा, पत्थर पानी घाम।
वन-वन अगर न छानते, राम न बनते राम।।

इस पूरे ब्रह्माण्ड में, क्या मेरी औक़ात।
बनी कहाँ फिर भी कहो, मुझ बिन इसकी बात।।
नरेश शांडिल्य

जन्मः १५ अगस्त, १९५८
शिक्षा : बी. कॉम ; एम.ए. हिंदी
भावप्रवण और प्रेरक दोहों के साथ साहित्य में अपनी अमिट उपस्थिति दर्ज करवाने वाले हमारी सदी के प्रमुख साहित्यिक हस्ताक्षर। जितनी तीखी कलम उतना ही सहज व्यक्तित्व।
कवि, दोहाकार, शायर, नुक्कड़ नाट्य कर्मी, समीक्षक और संपादक। विभिन्न विधाओं यथा दोहा/कविता/ग़ज़ल/गीत/लेख/समीक्षा/नाट्य-विमर्श आदि में 11 मौलिक संग्रह प्रकाशित तथा 9 पुस्तकों का संपादन।
प्रमुख सम्मान: हिंदी अकादमी , दिल्ली सरकार का साहित्यिक कृति सम्मान ; वातायन ( लंदन ) का अंतरराष्ट्रीय कविता सम्मान ; कविता का प्रतिष्ठित ‘परम्परा ऋतुराज सम्मान’; आचार्य महाप्रज्ञ साहित्य सम्मान ; साहित्य रत्न सम्मान।
देश-विदेश में 1000 से अधिक कवि सम्मेलनों/मुशायरों में काव्यपाठ
नुक्कड़ नाटकों के क्षेत्र में भारत सरकार के संस्कृति विभाग से ‘सीनियर फैलोशिप’
5 देशों की साहित्यिक यात्रा (इंग्लैंड में 2 बार, जॉहन्सबर्ग, साउथ अफ्रीका, बैंकॉक,थाईलैंड, मॉरीशस और नेपाल)
दो बार विश्व हिंदी सम्मेलन में भागीदारी
साहित्य की अंतरराष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका ‘अक्षरम संगोष्ठी’ का 12 वर्षों तक कुशल संपादन।
दिल्ली विश्वविद्यालय के विवेकानंद कॉलेज की गवर्निंग बॉडी में चयनित पूर्व कोषाध्यक्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय के एडमिशन प्रोसेस में ECA की रचनात्मक लेखन विधा में 3 वर्षों से निर्णायक समिति के प्रमुख सदस्य
भारतीय फ़िल्म सेंसर बोर्ड , सूचना व प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार में सलाहकार सदस्य
संप्रति: यूनियन बैंक के प्रबंधक पद से सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन ।
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संपर्क :
सत्य सदन , ए 5 , मनसा राम पार्क, संडे बाज़ार लेन, उत्तम नगर, नई दिल्ली 110059
मोबाइल : 9868303565
Email :
nareshshandilya007@gmail.com
भावपूर्ण
बहुत ही सुन्दर और अर्थपूर्ण दोहे
बहुत ही सहज और सरल भाषा में लिखते हुए बहुत कुछ कहने की कला संक्षेप में कहीं तो नरेश जी गागर में सागर भर देते हैं
दोहा सम्राट श्री नरेश शांडिल्य जी के उपरोक्त दोहे उनके श्रेष्ठ और सार्थक रचनाधर्मिता की एक झलक है। आप वर्तमान समय के उत्कृष्ट साहित्यकार हैं। आपको पढ़ना स्वयं को उर्जा प्रदान करने जैसा है।