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इब्ने ईँशा

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 1927- 11-1-1978

लुधियाना में जन्मे  शेर मोहम्मद खान की प्रारंभिक शिक्षा भी लुधियाना में ही हुई थी। 1948 में करांची में आ बसे और वहीं उर्दू कॉलेज से बी.ए. किया। बचपन से ही इब्ने इंशा नाम अपनाया और लिखा और इसी नाम से विख्यात भी हुए। उर्दू के मशहूर शायर और व्यंगकार। मिजाज और बयानगी में मीर की खस्तगी और नजीर की फकीरी भरी रूमानियत । मनुष्य के स्वाभिमान और स्तंत्रता के प्रबल हिमायती। 

हिंदी ज्ञान के बल पर औल इँडिया रेडिओ में काम किया फिर कौमी किताब घर के  निर्देशक, इंगलैंड स्थित पाकिस्तानी दूतावास में उर्दू के सांस्कृतिक मंत्री  और यूनेस्को के प्रतिनिधि रहे।

इंगलैंड में ही कैंसर से मृत्यु।

प्रमुख पुष्तकें, उर्दू की आखिरी किताब (व्यंग्य), चांद नगर, इस बस्ती इस कूंचे में, बिल्लू का बस्ता, यह बच्चा किसका है (बाल कविताएँ)

हम घूम चुके बस्ती बस्ती ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

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कतील शफाई

किया है प्यार जिसे ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

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कैफी आजमी

पत्थर के खुदा यहां भी ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

 

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गोपाल सिंह नेपाली

 

अपने पन का मतवाला था ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

 

 

 

 

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द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी 

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1. उठो धऱा के अमर सपूतों (लेखनी-अँक-11-जनवरी 2008) 

2. इतने ऊँचे उठो (लेखनी-अँक-11-जनवरी 2008)

 

 

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 भगवती चरण वर्मा

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(30-8-1903-5-10-1981)

शफीपुर ग्राम जिला उन्नाव उत्तर प्रदेश में जन्मे श्री भगवती शरण वर्मा जी की प्रमुख कृतियों में 'मेरी कविताएं' नामक संकलन उल्लेखनीय हैं। वर्माजी ने इलाहाबाद से बी.ए., एल. एल. बी. की डिग्री प्राप्त की और प्रारम्भ में कविता लेखन किया । फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात । १९३३ के करीब प्रतापगढ़ के राजा साहब भदरी के साथ रहे । १९३६ के लगभग फिल्म कारपोरेशन, कलकत्ता, में कार्य । कुछ दिनों ‘विचार’ नामक साप्ताहिक का प्रकाशन-संपादन, इसके बाद बंबई में फिल्म-कथालेखन तथा दैनिक ‘नवजीवन’ का सम्पादन, फिर आकाशवाणी के कई केंन्दों में कार्य । बाद में, १९५७ से मृत्यु-पर्यंत स्वतंत्न साहित्यकार के रूप में लेखन ।

‘चित्रलेखा’ उपन्यास पर दो बार फिल्म-निर्माण और ‘भूले-बिसरे चित्र’ साहित्य अकादमी से सम्मानित । पद्मभूषण तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त ।

  

बसंतोत्सव (लेखनी अंक-1-वर्ष-2-मार्च-2008)

संकोच भार को (लेखनी अंक-1-वर्ष-2-मार्च-2008)

अज्ञात देश से आना  (लेखनी अंक-1-वर्ष-2-मार्च-2008)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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महादेवी वर्मा

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(26 मार्च 1907-11 सितम्बर-1987)

जन्मः फरुख्खाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत।

मैं नीर भरी दुख की बदली (लेखनी-मार्च-2007)

तुम मुझमें प्रिय ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

 

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मैथली शरण गुप्त 

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 माँ कह एक कहानी (लेखनी-अंक-8-अक्टूबर 2007)

 
सखी वो मुझसे कहकर जाते (लेखनी-अंक-8-अक्टूबर 2007)

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मोहम्मद इकबाल

(1877 - 1938 )

  

कवि, दार्शनिक और स्वतंत्रता सेनानी इकबाल का जन्म सियालकोट, पंजाब( अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके कश्मीरी ब्राह्मण दादाजी श्री सहजराम सप्रू को इस्लाम धर्म अपनाना पड़ा था। 1904 में जब लाला हरदयाल ने (गदर पार्टी के संस्थापकों में से एक) ने लाहौर गवर्मेंट कॉलेज के युवा लेक्चरर को अपनी सभा में आमंत्रित किया तो इकबाल ने  ' सारे जहां से अच्छा' गीत गाकर सभी को स्तब्ध कर दिया था...गीत जो आजभी देश का गौरव है और हर देशप्रेमी के मन में अद्बुत देशप्रेम की लहर उठाता है।   

गीत --सारे जहां से अच्छा--लेखनी अंक 6-अगस्त-2007.

 

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दुष्यंत कुमार

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1 सितंबर 1933-30 दिसंबर 1975

बिजनौर, उत्तर प्रदेश में जन्मे दुष्यंत कुमार त्यागी को वर्तमान हिन्दी ग़ज़ल का प्रणेता माना जाता है। उनकी गजलों में पहली बार एक आम आदमी की आवाज एक आम आदमी से हाथ मिलाकर कही गयी। आज की ग़ज़लों के एक और महत्वपूर्ण हस्ताक्षर निदा फाजली के शब्दों में ;  

"दुष्यंत की नज़र उनके युग की नई पीढ़ी के ग़ुस्से और नाराज़गी से सजी बनी है। यह ग़ुस्सा और नाराज़गी उस अन्याय और राजनीति के कुकर्मो के ख़िलाफ़ नए तेवरों की आवाज़ थी, जो समाज में मध्यवर्गीय झूठेपन की जगह पिछड़े वर्ग की मेहनत और दया की नुमानंदगी करती है।

विषय की तब्दीली के कारण, उनकी ग़ज़ल के क्राफ्ट में भी तब्दीली नज़र आती जो कहीं-कहीं लाउड भी महसूस होती है. लेकिन इस तब्दीली ने उनके ग़ज़ल को नए मिज़ाज के क़रीब भी किया है।

दुष्यंत ने केवल देश के आम आदमी से ही हाथ नहीं मिलाया उस आदमी की भाषा को भी अपनाया और उसी के द्वारा अपने दौर का दुख-दर्द गाया...

जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले
मरें तो ग़ैर की गलियों में गुलमोहर के लिए "

 

कविता-धरोहर 

चांदनी छत पे ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

हो गई है पीर ( लेखनी अँक 10- दिसंबर-2007)

 

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डा. धर्मवीर भारती

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उत्तर हूँ तुम्हारा ( लेखनी अँक 12-फरवरी-2008)

 

 

 

 

 

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डा. रामकुमार वर्मा

एकांकी सम्राट डॉ. रामकुमार वर्मा का जन्म १५ सितम्बर सन् १९०५ ई. में मोहल्ला गोपालगंज, सागर में हुआ था। आप इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विभागाध्यक्ष --हिन्दी-- पद से सेवा निवृत हुये। वीर हम्मीर, चित्तौड़ विजय --प्रबन्ध काव्य-- निशीथ, बालि वध, एकलव्य, --खण्ड काव्य-- कुलललना, नूरजहाँ, भोजराज, जौहर --आख्यान गीत, पृथ्वीराज की आंखें, रेशमी टाई, रुप-रंग, कुन्ती का परिताप, शिवाजी, रिम-झिम, कौमुदी महोत्सव --ऐतिहासिक एकांकी-- मयूर पंख, खट्टे-मीठे, ललित एकांकी, मेरे श्रेष्ठ रंग एकांकी प्रकाशित हैं। साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास, कबीर ग्रन्थावली --सम्पादित-- कबीर का रहस्यवाद, कबीर : एक अनुशीलन, संस्मरणों के सुमन भी प्रकाशित हैं। आपके काव्य संग्रह अंजलि, अभिशाप, रुपराशि, चारुमित्र, सप्तकिरण, हिमहास, स्मृति के अंकुर, रुप-रंग, ॠतुराज, दीपदान, कामकंदला, चन्द्र किरण, बापू, इन्द्रधनुष, अग्निशिखा, अशोक का शोक आदि हैं।

डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार थे। वे श्रेष्ठ कवि तथा एकांकी लेखन के अद्वितीय रचनाकार थे। एक महान नाटककार एवं साहित्य के मूर्धन्य अध्येता थे। उनका प्रत्येक ग्रन्थ साहित्य जगत में प्रकाशमान है। सन् १९६३ ई. में "पद्म भूषण' से सम्मानित हुए।

 

 मैं सदा बरसने वाला मेघ बनूँ ( लेखनी-अंक-5-जुलाई 2007)

 

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रामचन्द्र द्विवेदी -प्रदीप-

(6 फरबरी 1915-1998)

कवि प्रदीप ने भारतीय फिल्मों को कई यादगार और मधुर गीत दिए हैं। उनके देशप्रेम से भरपूर गीतों का अपना एक विशिष्ट स्थान है। कहते हैं-ए मेरे वतन के लोगों-इस गीत को जब नेहरू जी ने पहली बार सुना था तो असंख्य अन्य आम भारतीयों की तरह वह भी रो पड़े थे। 1997-98 में उन्हें ' दादा फालके ' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

 ' गीत-ए मेरे वतन के लोगों'-लेखनी अंक 6-अगस्त 2007

   

 

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रमानाथ अवस्थी

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(1926-29 जून 2002)

मैं सदा बरसने वाला (लेखनी-अंक-5, जुलाई 2007)

मेघ सांवले छा गये हैं( लेखनी-अंक-5, जुलाई 2007)  

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राम अवतार त्यागी

 

आने से मेरे ( लेखनी-जून-2007)

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रामेश्वर शुक्ल अँचल

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दो सजा मुझको -(लेखनी-अँक 12-फरवरी 2008)

जब नींद नहीं आती होगी-  (लेखनी-अँक 12-फरवरी 2008)

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रामधारी सिंह 'दिनकर'

1908---अप्रैल 1974

 

चांद और कवि ( लेखनी-अंक 2- अप्रैल-2007)

चांद का कुर्ता ( लेखनी-अंक-4-जून-2007)

वसंत राजा बरखा ऋतुओं की रानी(लेखनी-अंक-5-जुलाई-2007)

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लक्ष्मीमल सिंघवी 

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1. हिन्दी अपनी परिभाषा-(लेखनी-अंक-6-अगस्त-2007) 

 

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हरिवंश राय बच्चन

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27-11-1907--18-1-2003

लो दिन बीता लो रात गयी ( लेखनी अंक-2-अप्रैल-2007)

जो बीत गयी सो बात गयी ( लेखनी अंक-4- जून-2007)

जीवन की आपाधापी में (लेखनी अंक 7-सितंबर-2007)

इसपार प्रिये मधु है--(लेखनी अंक 7-सितंबर-2007)

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शिवमंगल सिंह सुमन

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पर आँखें नहीं भरी (लेखनी अँक 12-फरवरी 2008)

विवशता (लेखनी अँक 12-फरवरी 2008)

 

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शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

टूट रहा कुछ (लेखनी-अंक-8-अक्टूबर 2007)

कठपुतले (लेखनी-अंक-8-अक्टूबर 2007)

गन्दी माता (लेखनी-अंक-8-अक्टूबर 2007)

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

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15 सितम्बर 1927-24 सितम्बर1983

वाणी मत देना (लेखनी-अप्रैल 2007)

 

 

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सियाराम शरण गुप्त

बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार श्री सियारामशरण गुप्त का जन्म भाद्र पूर्णिमा सम्वत् १९५२ वि. तद्नुसार ४ सितम्बर १८९५ ई. को सेठ रामचरण कनकने के परिवार में श्री मैथिलीशरण गुप्त के अनुज रुप में चिरगांव, झांसी में हुआ था। प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर घर में ही गुजराती, अंग्रेजी और उर्दू भाषा सीखी। सन् १९२९ ई. में राष्ट्रपिता गांधी जी और कस्तूरबा के सम्पर्क में आये। कुछ समय वर्धा आश्रम में भी रहे। सन् १९४० ई. में चिरगांव में ही नेता जी सुभाषचन्द्र बोस का स्वागत किया। वे सन्त बिनोवा जी के सम्पर्क में भी आये। उनकी पत्नी तथा पुत्रों का निधन असमय ही हो गया। मूलत- आप दु:ख वेदना और करुणा के कवि बन गये। साहित्य के आप मौन साधक बने रहे।

'मौर्य विजय' प्रथम रचना सन् १९१४ में लिखी। अनाथ, आर्द्रा, विषाद, दूर्वा दल, बापू, सुनन्दा, गोपिका आपके खण्ड काव्य हैं। मानुषी --कहानी संग्रह--, पुण्य पर्व --नाटक--, गीता सम्वाद, --अनुवाद--, उन्मुक्त गीत --नाट्य--, अनुरुपा तथा अमृत पुत्र --कविता संग्रह-- सर्वप्रसिद्ध है। दैनिकी नकुल, नोआखली में, जय हिन्द, पाथेय, मृण्मयी, आत्मोसर्ग काव्यग्रन्थ हैं। "अन्तिम आकांक्षा', "नारी' और गोद उपन्यास है। "झूठ-सच' निबन्ध संग्रह है। ईषोपनिषद, धम्मपद भगवत गीता का पद्यानुवाद आपने किया।

दीर्घकालीन हिन्दी सेवाओं के लिए सन् १९६२ ई. में "सरस्वती' हीरक जयन्ती में सम्मानित किये गये। आपको सन् १९४१ ई. में "सुधाकर पदक' नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी द्वारा प्रदान किया गया। आपकी समस्त रचनाएं पांच खण्डों में संकलित कर प्रकाशित है। असमय ही २९ मार्च १९६३ ई. को लम्बी बीमारी के बाद मां सरस्वती के धाम में प्रस्थान कर गये।

 बापू (लेखनी-अंक-8-अक्टूबर 2007)

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 सूरदास

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भक्ति काल के तीन प्रमुख कवियों में तुलसी और मीरा के साथ सूरदास का नाम बहुत ही आदर से लिया जाता है। वात्सल्य और श्रंगार रस के सम्राट सूरदास को भारतीय काव्याकाश का सूरज कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है । 'सूर सूर तुलसी शशी, उद्गन् केशवदास, अन्य कवि खद्गोत सम जंह तंह करत प्रकास '। उनका प्रमुख ग्रन्थ सूरसागर हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि है। सूरदास की आयु "सूरसारावली' के अनुसार उस समय ६७ वर्ष थी। 'चौरासी वैष्णव की वार्ता' के आधार पर उनका जन्म रुनकता अथवा रेणु का क्षेत्र (वर्तमान जिला आगरान्तर्गत) में हुआ था। मथुरा और आगरा के बीच गऊघाट पर ये निवास करते थे। गुरु बल्लभाचार्य से भी इनकी भेंट वहीं पर हुई थी। "भावप्रकाश' में सूर का जन्म स्थान सीही नामक ग्राम बताया गया है। वे सारस्वत ब्राह्मण थे और जन्म के अंधे थे। मदन मोहन, और सूरज दास आदि कई इनके नाम बताए गए हैं और कहा जाता है कि इनकी आयु 105 वर्ष थी।
"आइने अकबरी' में (संवत् १६५३ वि०) तथा "मुतखबुत-तवारीख' के अनुसार सूरदास को अकबर के दरबारी संगीतज्ञों में माना है।

सूरदास श्रीनाथ की "संस्कृतवार्ता मणिपाला', श्री हरिराय कृत "भाव-प्रकाश", श्री गोकुलनाथ की "निजवार्ता' आदि ग्रन्थों के आधार पर, जन्म के अन्धे माने गए हैं। लेकिन राधा-कृष्ण के रुप सौन्दर्य का सजीव चित्रण, नाना रंगों का वर्णन, सूक्ष्म पर्यवेक्षणशीलता आदि गुणों के कारण अधिकतर वर्तमान विद्वान सूर को जन्मान्ध स्वीकार नहीं करते।
श्यामसुन्दरदास ने इस सम्बन्ध में लिखा है - ""सूर वास्तव में जन्मान्ध नहीं थे, क्योंकि श्रृंगार तथा रंग-रुपादि का जो वर्णन उन्होंने किया है वैसा कोई जन्मान्ध नहीं कर सकता।'' डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - ""सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं, पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए।

 जशोदा हरि पालने झुलावै  ( लेखनी -अंक-6-अगस्त 2007)

काहू जोगी की नजर लगी है ( लेखनी-अंक-6-अगस्त 2007)

मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ( लेखनी-अंक-6-अगस्त 2007)

सबसे ऊँची प्रेम सगाई (लेखनी-अँक-12-फरवरी 2008)

मैया मोहे दाऊ बहुत खिजायो ( लेखनी-अंक-6-अगस्त 2007)

मैया मोरी कबहूँ बढ़ेगी चोटी ( लेखनी-अंक-6-अगस्त 2007)

ग्वालिन तैं मेरी गेंद चुराई ( लेखनी-अंक-6-अगस्त 2007)

बूझत श्याम कौन तू गोरी ( लेखनी-अंक-6-अगस्त 2007)

 

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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

 

(21 फरवरी 1896-15 अक्तूबर 1961)

 

कुकुरमुत्ता ( लेखनी-मई-2007)

आज प्रथम गाई पिक पंचम (लेखनी-मई-2007)

हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती (लेखनी-अक्टूबर-2007)  

 

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