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दो लघु कथाएँ
संस्कार
-श्याम सुन्दर व्यास
सार्वजनिक नल पर पानी भरने वालों की भीड़ जमा हो गयी थी। हंडा भर जाने के बाद बूढ़ी अम्मा से हंडा उठाया नहीं जा रहा था।
लोगों का धैर्य बड़बड़ाहट में बदलने लगा। मनकू ने हंडा हटाकर अपनी बाल्टी लगाते हुए कहा-" बहू को मैंहदी लगी है क्या, जो तू आई है?"
कातर स्वर में बुढ़िया के बोल फूटे-" उसका पांव भारी है। "
मनकू को लगा जैसे किसी ने उस पर घड़ों पानी डाल दिया हो। उसने हंडा उठाया और बूढ़ी अम्मा के द्वार पर रख आया।
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श्रद्धांजली
नदीम अहमद नदीम
अनुशासनहीनता के नाम पर अग्रिम पंक्ति के एक नेता को पार्टी द्वारा निष्काषित कर दिया गया। पूरी जिन्दगी निष्ठापूर्वक समर्पित कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करने का दम्भ भरने वाले नेताजी उम्र के आखिरी दौर में यह सदमा सहन नहीं कर सके तथा कुछ समय में ही हृदयगति रुकने से दुनिया से कूच कर गये। अंतिम दर्शन के लिए घर के बाहर भीड़ जमा हो गई। अनेक पार्टियों के नेताओं के साथ निष्काषित करने वाली पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मौजूद थे।
मीडिया ने उनको घेर लिया। अपने को गमजदा दिखाने का प्रयास करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष रुँधे गले से श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कह रहे थे।
" आज देश ने एक महान नेता खो दिया, मजदूरों किसानों ने अपना सच्चा हमदर्द खो दिया। वे आदर्शवादी इंसान थे। हमें चाहिए कि ङम उनके बताए हुए मार्ग पर चलें। "
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