सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
(नदी-मन)
" जीवन-सरिता की लहर-लहर, मिटने को बनती यहाँ प्रिये संयोग क्षणिक, फिर क्या जाने हम कहाँ और तुम कहाँ प्रिये । पल-भर तो साथ-साथ बह लें, कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें ।" -भगवती चरण वर्मा
अंक-17-वर्ष-2-जुलाई-2008
संरचना व संपादनः शैल अग्रवाल
संपर्क सूत्रः editor@lekhni.net; shailagrawal@hotmail.com Lekhni is updated on every first day of the month. पत्रिका प्रति माह की पहली तारीख को परिवर्तित की जाती है।