स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा, स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था, ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों को एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है ? है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ?
- हरिवंश राय बच्चन
(वर्ष-3-अँक-36)
इस अंक में- कविता धरोहरः हरिवंशराय बच्चन। माह विशेषः मोहन अम्बर, धर्मवीर भारती।कविता आज और अभीः जयन्ती अग्रवाल, केशव शरण, किशोर जैन, राजीव मतवाला। माह के कविः दीक्षित दनकौरी। बाल गीतः निर्मला सिंह।
मंथनः अज्ञेय। कहानी समकालीनः शैल अग्रवाल। कहानी विशेषः मीरा कान्त। कहानी समकालीनः दिनेश ध्यानी। लघुकथाः देवी नागरानी। हास्य व्यग्यः कनछेदी राम। रागरंगः कवि कुलवंत। सरोकारः वीरेन्द्र सिंह यादव। चौपालः वेदप्रताप वैदिक । परिचर्चाः मनोज मिश्रा। बाल कहानीः निर्मला सिंह।
In the English Section:
Mad Man: Khalil Gibran. Favourites Forever: John Milton. Poetry Here & Now: Milorad Krystanovich . Story: Divya Mathur. Kids Corner : A Tale of Akbar & Birbal & Kids Nursery Rhyme: Shail Agrawal.