द्रुम समीर कंपित थर-थर-थर झरती धाराएँ झर-झर-झर जगती के प्राणों में स्मर शर बेध गए कस के ...
-सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला '
(लेखनी-वर्ष-4-अँक-41)
सावन विशेषांक
माह विशेषः सावन के लोक गीत। हाइकू और क्षणिकाएँ : लालबिहारी लाल , शैल अग्रवाल। माह के कविः जतिन्दर परवाज़ । कविता आज और अभीः श्याम सुन्दर दुबे, केसरीनाथ त्रिपाठी, शंभुनाथ, दामोदर लाल जागिड़, प्राण शर्मा, शील निगम। कविता धरोहरः माखनलाल चतुर्वेदी, सुमित्रानन्दन पंत। शिशुगीतः अज्ञात ।
मंथनः डोमन साहू समीर। परिचर्चाः डॉ. रामचन्द्र रॉय। कहानी समकालीनः रश्मि बड़थ्वाल । कहानी समकालीन शैल अग्रवाल। लघुकथाः आलोक सातपुते । चौपालः सीताराम गुप्ता । हास्य व्यंग्यः शरद जोशी। संस्मरणः शैल अग्रवाल। रागरंगः कादम्बरी मेहरा। परिदृश्यः अजय पाराशार । बाल-कहानीः शैल अग्रवाल । माह की साहित्यिक खबरों और गतिविधियों से भरपूर विविधा।
In the English Section:
Rain -Few poems: Matsuo Basho Tu Fu, Tagore. Favourites Forever: Ravindra Nath Tagore.Story: Pablo Anton Chekhov. Kids'Corner: Story Rudyard Kipling , Poetry: a traditional nursery rhyme & kid's poems by Shail agrawal and Shel Silverstein . Inspirational- A Folk lore .