’कथाबिंब’ के कहानी विशेषांक का लोकार्पण

 

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कथाप्रधानत्रैमासिकपत्रिका “कथाबिंब” के कहानी विशेषांक का लोकार्पण कार्यक्रम शनिवार , २४मई , २०१४कोचेंबूर, मुंबई केविवेकानंदकला, विज्ञान, वाणिज्य महाविद्यालय केसभागार में संपन्न हुआ। लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुंबई विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामजीतिवारी थे।

माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के बाद “कथाबिंब” के प्रधान संपादक डॉ. माधवसक्सेना ‘अरविन्द’, संपादिका मंजुश्री तथा संस्कृति सरंक्षण संस्था, मुंबई की न्यासी डॉ. कु. मिथलेश सक्सेना ने मुख्य अतिथि तथा अन्य अतिथियों का स्वागत किया. ज्ञात हो कि “कथाबिंब” पत्रिका का प्रकाशन संस्कृत सरंक्षण संस्था, मुंबई के सौजन्य से किया जाता है .

कार्यक्रम के आरम्भ में डॉ. माधव सक्सेना ने “कथाबिंब” के पैंतीस वर्षों केसफ़र का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया. उन्होंने कहानी विशेषांक के अतिथि संपादक वरिष्ठ कथाकार डॉ. रूपसिंहचंदेल के परिश्रम और सहयोग की सराहना की. मुख्य अतिथि प्रो. रामजी तिवारी ने अपने संबोधन में “कथाबिंब” के ३५ वर्षों से अनवरत होते आ रहे प्रकाशन के लिए प्रधान संपादक डॉ. माधव सक्सेना, संपादिका मंजुश्री एवं अन्य सहयोगियों के  प्रयासों की प्रशंसा करते हुए साहित्य और समाज के सामने आ खड़ी हुई चुनौतियों का उल्लेख किया. उन्होंने विशेष रूप से “कथाबिंब” की इस बात के लिए प्रशंसा की कि पत्रिका ने कभी भी अपने मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया.

लब्ध प्रतिष्ठ कथाकार डॉ. सूर्यबाला ने अपने वकतव्य में कहा कि व्यावसायिकता और सामाजिक मूल्यहीनता के इस दौर में “कथाबिंब” बिना किसी विवाद में पड़े, अपने संकल्पों के साथ बिना कोई समझौता किये पाठक वर्ग को सर्वोत्तम देने के प्रयास में सफल रही है.

वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश ने अपने वकतव्य में ‘आज का समय और कहानी’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये. उन्होंने सचेत किया कि समाज में तीव्रता से आ रहे बदलाव, पाठकों का अभाव और इंटरनेट तथा फ़ेसबुक के बढ़ते दौर में लेखन कार्य बड़ा चुनौती पूर्ण हो गया है . उन्होंनेअपनीएककहानीकेकुछअंशप्रस्तुतकिये .

इस अवसर पर कहानीकार डॉ. रमाकांत शर्मा ने अपनी कहानी ‘दो लिफ़ाफ़े’ और कहानीकार अशोक वशिष्ठ ने अपनी कहानी ‘मुंसी ताऊ’ का वाचन किया .

कार्यक्रम प्रसिद्ध लेखिका और फिल्मकलाकार सविता बजाज के सान्निध्य में संपन्न हुआ।  इस अवसर पर हस्तीमल ‘हस्ती’, अरविन्दशर्मा ‘राही’, श्रीमती राजेश्वरी दुष्यंत (श्रीमतीदुष्यंतकुमार), आलोक त्यागी, अनंत श्रीमाली, श्रीमतीगायत्री  कमलेश्वर आदि बड़ी संख्या में साहित्यकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन जयप्रकाश त्रिपाठी ने किया  .

प्रस्तुति – अशोक वशिष्ठ

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चित्र 1. दीप प्रज्वलित करती सविता बजाज. साथ में सूरज प्रकाश,अशोक वशिष्ठ,डॉ.सूर्यबाला, और प्रो.रामजी तिवारी.

चित्र 2. : उपस्थित साहित्यकार और साहित्य प्रेमी

 

 

 

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