लेखनी/Lekhni
होली विशेष

आज बिरज में होली है रे रसिया, बरजोरी है रसिया….
लेखनी परिवार की ओर से रंगपर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ,
फागुन के दिन चार रे, तो क्यों न मिलजुलकर मनाएँ यह रंगों का जोशीला त्योहार
होली के रंग
सदा ही तो सुहाने
अपनों संग
शैल अग्रवाल
एक बार फिर प्यार के सारे इंद्रधनुषी रंग लिए होली का यह रंग-बिरंगा त्योहार आ ही गया है, तो होली के इस राग-रंग भरे त्योहार पर कांजी, गुजिया के साथ आपका आनंद दुगना करने को रसमय कविता और हास्य-व्यंग्य की चुटकियों के साथ प्रस्तुत है लेखनी की ‘ रंग तरंग ‘ भरी कवितायें और कुछ चुटकियाँ गुलाल की और कुछ कहानी , कविता और संस्मरण भी…
परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल
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