सशक्त और कर्मठ रचनाकार सुषम बेदी नहीं रहीः विनम्र श्रद्धांजलि।


(शैल अग्रवाल सुषम बेदी के साथ- वाराणसी, 18 जनवरी 16)
कलम ठिठक गई है और बात उन्हीकी एक कविता की इन पंक्तियों से मन शुरु करना चाहता है,
आज वह सूत्र फिर से बँध गया
जो टूट गया था बरसों से
क्यों नदी की धार
अचानक गायब हो कर
फिर से नदी बन जाती है
मेरा ममत्व मुझसे टूट कर
आ जुड़ा है इस नए प्रवाह में
सुषम बेदी
गत् 21 मार्च को चारो तरफ खबर थी -सुषम बेदी नहीं रहीं। स्तब्ध हूँ। यूँ तो सुषम बेदी जी से चार पांच मुलाकात ही हुई थीं। कभी जी भरकर इतनी बात नहीं हुई कि ठीक से जान पाऊँ, पर उनकी कहानियों और कविताओं के जरिए उन्हें बेहद अपने मन के करीब पाती थी। उनके लिखित विचारों ने सदा ही प्रभावित किया, जितना भी पढ़ा और जाना उन्हें. चाहे वह सड़क की लय कहानी हो या फिर चील और चिड़िया मन की तहों में पैठती ही चली गईं उनकी रचनाएँ । कवि और साहित्यकारा सुषम जी की बहुत कद्र है मेरे मन में। बस दुख इस बात का है कि यह सब मैंने उनसे तब क्यों नहीं कहा जब वह जीवित थीं, कई मौके मिले थे । एक पिकनिक हमने साथ मनाई जहाँ वक्त पर उन्होंने अपनी एक कविता पढ़ी, जो सोचने पर मजबूर कर रही थी। कथा यू.के. एक प्रोग्राम में हमने साथ-साथ कहानी पाठ किया, उन्होंने अपनी कहानी अवसान पढ़ी थी और मैंने आम आदमी। कृति यू.के. एक कार्यक्रम में भी वह आई थीं, वह सबसे लम्बा वक्त था जो हमने साथ-साथ बिताया था, क्योंकि बाद में साथ खाना खाने भी हम गए थे और उनके पति राहुल बेदी जी भी साथ थे । फिर 2016 की जनवरी में बनारस में भी मिले प्रवासी साहित्य सम्मेलन में पर कभी भी औपचारिक हाय हलो और कैसी हैं -मैं ठीक हूँ-आदि के अलावा कोई विशेष बात नहीं हुई। उनके आग्रह पर बेटी पूजा की रिलीज हुई फिल्म भी देखी, पर कभी ख्याल ही नहीं आया कि वह इतनी जल्दी चली जाएँगी। जिन्दगी और इसके ढर्रे इतने स्थाई लगते हैं कि कभी कुछ अशुभ का न तो ख्याल ही आता है और ना ही कोई जल्दी ही रहती है पर मौत हमेशा ही जिन्दगी को हराती रही है और एकबार फिर उसने एक सशक्त रचनाकार को अपनी झोली में समेट लिया है ।

जिंदगी को गूंगा करता
मौत को वाचाल
वक्त
क्यों
मुझसे, तुमसे
बड़ा हो जाता है
– सुषम बेदी
सवाल जो आजभी क्षणभंगुर मानव को विवश करते रहते हैं, उन्हीकी चन्द पंक्तियों के साथ लेखनी परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। भगवान दिव्यात्मा को अपने चरणों में स्थान दे।
शैल अग्रवाल

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