लेखनी/Lekhni-सितंबर-अक्तूबर-16


सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
लेखनी/Lekhni
Bridging The Gap
sept-oct-16

तुम्‍हें लिख सकता तो लिखता....तुम्‍हें कह सकता तो कहता......
तुम्‍हें रच सकता तो रचता......बस सोचता रहा...

इस सोच में भी पूरे कहां समाए तुम............
-माया मृग

केन्द्र से परिधि तक
( नारी अस्मिता विशेषांक)
वर्ष 10, अंक 104
इस अंक में- अपनी बात। गीत और ग़ज़लः साहिर लुधियानवी। कविता आज और अभीः अज्ञात, विनीता जोशी, रचना श्रीवास्तव, सरस्वती माथुर, शील निगम, शबनम शर्मा, कमलकुमार, शैल अग्रवाल । माह के कविः विजय सप्पत्ति। क्षणिकाएँः पुष्पिता अवस्थी, शैल अग्रवाल। कविता धरोहरः अज्ञेय। गीत और ग़ज़लः त्रिवेणी- गुलजार।
मंथनः केन्द्र से परिधि तक-शैल अग्रवाल । परिचर्चाः नारी सशक्तिकरण-रामसिंह यादव । कहानी धरोहरःएक जीवी, एक रत्नी-एक सपना- अमृता प्रीतम । कहानी समकालीनः अपने अपने घोंसले, अपनी अपनी उड़ान- गोवर्धन यादव । कहानी समकालीनः मदहोश-बलराज सिद्धूः पंजाबी से अनुवादः सुभाष नीरव। कहानी समकालीनः आधे-अधूरेः शैल अग्रवाल।। दो लघुकथाएँःः शबनम शर्मा । चांदपरियाँ और तितलीः बाल कहानी-सुमति की संपति व बाल कविता-जीवन की बगिया में-शैल अग्रवाल ।
In the English Section: My Column. Favourites Forever: Thomas Hardy. Poetry Here & Now: Being Women-Shail Agrawal. Story Classic- Thomas Hardy. Story Contemporary:Divya Mathur.

परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल

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