जिम कार्बेट नेशनाल पार्कः दिनेश ध्यानी

सुकून और रोमांच का संगम जिम कार्बेट पार्क
यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं और प्रकृति के नजदीकियों को अनुभव करने के साथ-साथ रोमांचकारी दृश्यों से रूबरू होना चाहते हैं तो हम आपको न्यौता देते हैं मध्य हिमालय की गोद में जिला नैनीताल जिले की हसीन वादियों में स्थित जिम कार्बेट नेशनल पार्क आने का। यहां आकर आपको आत्मिक सुकून तो मिलेगा ही, साथ कई अनुभवों की बानगी एक साथ देखने को मिलेगी और हम यकीन से कह सकते हैं कि जब आप यहां से वापस जा रहे होंगे तो मन में यह जरूर विचार करेंगे कि जल्दी ही दुबारा एक बार यहां जरूर आयेंगे। हिमालय की गोद में बसे इस प्राणी उद्यान में आप जंगली जानवरों से, सैकड़ों प्रजाति की दुर्लभ चिड़ियों, घड़ियाल तथा हिरनों व जंगली हाथियों से रूबरू तो होंगे ही यहां बह रही रामगंगा नदी भी आपको जीवन में निरन्तरता का संदेश देती नजर आयेगी वहीं पहाड़ों गिरते झरने यहां के शांत वातावरण और प्राकृतिक सौन्दर्य पर चार चांद लगाते हुए जगह-जगह नजर आ जायेंगे। पास ही में रामगंगा नदी के बीचोंबीच एक उच्च शिखर पर स्थित गर्जिया माता का पौराणिक मंदिर दूर से ही नतमस्तक होने को विवश कर देता है। यह वही स्थान है जहां वे गढ़वाल तथा कुआऊँ की पहाड़ियां शुरू होती हैं। कार्बेट पार्क में अन्य जीव जन्तुओं के साथ ही आप जंगल के राजा शेर तथा हाथियों व बाघों से भी मुखातिब हो सकते हैं। यहां रॉयल बंगाल टाइगर से भी आपकी भेंट हो सकती है। कार्बेट पार्क में जंगल के बासिंदों के लिए यहां का वातारण काफी महफूज माना जाता है यही कारण है हाल की के वर्षों में ही दुर्लभप्राय: गिद्ध, बाघों तथा कई प्रकार के पक्षियों की संख्या में इजाफा देखा गया है। यहां लगभग ११५ बाघ हैं तथा दर्जनों गिद्धों को भी यहां उड़ान भरते देखा गया है। गौरैया, मोर तथा अन्य दुर्लभ पंछी भी यहां हाल ही में अपना वंश बढ़ा रहे हैं।

भारत के वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में से एक कार्बेट पार्क का नामकरण ब्रिटिश मूल के भारत में जन्मे प्रसिद्ध शिकारी तथा फोटोग्राफर जिम कार्बेट के नाम पर सन् १९७३ में किया गया। इससे पहले सन् १९३६ में जब इस पार्क की स्थापना की गई तब इसका नाम हैली नेशनल पार्क रखा गया था। यह पार्क भारत का पहला प्राणी उद्यानों में से एक है। कार्बेट पार्क रामनगर से १५ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में ढिकाला से शुरू होकर पश्चिम दक्षिण में कोटद्वार, दुगड्ड़ा तक फैला हुआ है।

कार्बेट पार्क लगभग १२०० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ प्राणी उद्यान है। इसके अन्दर कई गांव तथा बस्तियों थी लेकिन आये दिन वन्यप्राणियों के जीवन में हो रहे खलल तथा शेर व बाधों आदि से लोगों को हो रही हानि के कारण प्रशासन यहां से लोगों को विस्थापित कर रहा है। पार्क में घने जंगलों से भी आपको सावधान रहना होगा ही साथ ही पानी के तालाब में उतरना हो तो जरा सावधानी से उतरें यहां घात लगाये बैठे घड़ियाल कहीं आपको नुकसान न पहुॅंचा पायें। यहां की हरियाली तथा कल-कल कर बहते नदी नाले आपको बरबस आकर्षित करते हैं।

यहां आकर आपको पहाड़ों के जन जीवन को भी नजदीक से देखने और महसूस करने का मौका मिलेगा ही बिना पहाड़ों में गाड़ी चलाने का जोखिम लिये ही आप पहाड़ों की सैर कर सकेंगे क्योंकि पहाड़ यहीं से शुरू होते हैं। कार्बेट पार्क में दुर्लभ प्राणियों के अतिरिक्त सैकड़ों प्रजाति की वनस्पतियां तथा पेड़ आदि भी मौजूद हैं।

कार्बेट पार्क आने के लिए यहां का नजदीकी स्टेशन रामनगर होते हुए आना होगा। रामनगर तक आप रेल तथा सड़क मार्ग द्वारा आसानी से आ सकते हैं। दूसरी ओर हवाई मार्ग द्वारा आप फूलबाग, पंतनगर तक आ सकते हैं यहां वे कार्बेट पार्क ५० किलोमीटर है जो कि सड़क से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से सड़क मार्ग से मात्र २७५ किलोमीटर दूरी पर कार्बेट पार्क है। यह पार्क देश के सभी मुख्य शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा है। यहां आप अपने वाहन से भी आ सकते हैं। खासकर दिल्ली से सुबह चलकर अपने वाहन से आप मात्र पांच-छ: घंटे में रामनगर पहुंच सकते हैं। रामनगर से कार्बेट पार्क मात्र पन्द्रह किलोमीटर दूरी पर है, जो कि सममतल सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। कार्बेट पार्क पूर्व में रामनगर से पश्चिम में कोटद्वार तक फैला हुआ है।

यहां कार्बेट पार्क मुख्य गेट तक मोटर द्वारा आया जा सकता है। आप यहां रामनगर से अपने वाहन या निगम की बस या रामनगर से ही प्राइवेट वाहन से भी आ सकते हैं। पार्क के अन्दर आपको अपनी गाड़ी ले जाने की अनुमति आसानी से नही मिल सकती है। यहां पर वन विभाग की जीपें तथा हाथियों से भी आप पार्क के अन्दर घूम सकते हैं। पार्क के अन्दर गाईड़ के ही निर्देशों पर चलें क्यों कि यहां पार्क खुला हुआ है और जंगली जानवर अक्सर खुले में ही घूमते हैं इसलिए जरा सी असवाधानी जान को सांसत में ड़ाल सकती है। यहां ठहरने के लिए पार्क के अन्दर ही वनविभाग के गेस्ट हाउस हैं लेकिन उनकी बुकिंग पूर्व में कराना जरूरी है। आप दिनभर पार्क की सैर करके शाम को रात्रि विश्राम के लिए रामनगर में भी रूक सकते हैं। रामनगर यों तो छोटा सा शहर है लेकिन आधुनिक सुविधाओं तथा ठहरने के लिए आपकों अच्छे होटल उचित किराये पर मिल सकते हैं। यहां आप घर जैसा महसूस कर सकते हैं। गढ़वाल तथा कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के कारण यहां पहाड़ी जनजीवन को भी आप करीब से देख सकते हैं।

कार्बेट पार्क आने के बाद आप यहां फिंशिंग सफारी तथा वर्ल्ड सफारी का आनन्द भी उठा सकते हैं यहां ऊंचाई से उड़ान भरती सैकड़ों चिड़ियों को आप एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी की ओर जाते हुए देख सकते हैं। रात में यहां जानवरों की भांति-भांति की आवाजें तथा कलरव आपको सुनने को मिलता है।

कार्बेट पार्क १५ नवम्बर से १५ जून तक ही खुला रहता है उसके बाद १६ जून से १४ नवम्बर तक पार्क मुख्यत: बन्द ही रहता है। क्योंकि यहां बरसात के मौसम में भयंकर बारिश होती है जिससे यहां आना खतरे से खाली नही है। बरसात शुरू होने के कारण पार्क बन्द कर दिया जाता है। यहां आते समय आप हल्के उनी वस्त्र तथा कुछ जीवनरक्षक दवाईयां अपने साथ लेकर जरूर आयें। यहां जंगली इलाका होने के कारण कोई भी चीज आसानी से नही मिल सकती है लेकिन रामनगर में आपको हर प्रकार की सुविधा तथा साधन मिल जायेंगे।

दिनेश ध्यानी