चाँद परियाँ और तितलीः बाल कहानी-शैल अग्रवाल, कविता-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

चीन और चमगादड़
शैल अग्रवाल

बच्चों, यह चीन और चमगादड़ की कहानी इतनी भी डरावनी नहीं कि आप जीना ही भूल जाएँ।
चीन एक दूर देश में रहने वाला व्यापारी था जो बस दिन रात अपने व्यापार और प्रभुता के बारे में ही सोचता, उसी में व्यस्त रहता। घर में उसकी अंधी पत्नी चमदागड़ दिनरात उसका घर और माया संभालने में उलटी लटकी रहती। कुछ और कर ही न पाती। इतने व्यस्त थे दोनों अपने घर-संसार में कि कब सूरज उगा, कब डूबा, दिन रात किसी का होश ही नहीं था उन्हें। अकूत दौलत , शान-पहचान सभी कुछ थे उनके पास सिवाय एक औलाद के। बहुत सारी पूजा-जतन के बाद उनके घर बेटा हुआ। चमगादड़ और चीन दोनों की खुशी का ठिकाना न था। चमगादड़ जो ज्यादा कुछ नहीं कर पाती थी उसने मन-ही-मन सोचा अब यह उसके सारे सपने पूरे करेगा। बड़े ही प्यार से माथा चूमकर बेटे का नाम रखा- ‘करो-ना’। पर यह नहीं बताया कि करना क्या है उसे। बेटा ने भी तुरंत ही पंख फैलाए और उड़ चला श्रवण कुमार की तरह माँ की इच्छा पूरी करने, बिना कुछ सोचे-समझे, बिना कुछ पूछे और जाने कि क्या करवाना चाहती है उसकी माँ ।
सबसे पहले धरती के दो चक्कर लगाए । फिर हर चीज का जी भरकर जायजा लिया। वहाँ खड़े मानवता के सुंदर पेड़ ने उसे बहुत लुभाया। आवेश में लगा वह कस-कसकर उसे झकझोरने। फूल पत्तियों से मानव झरने लगे उसके चारो तरफ। बड़ा आनन्द आ रहा था उसे अपने इस अमानवीय खेल में। अट्टाहास करके हंसने लगा वह। किसीकी दर्दभरी चीख, दारुण पुकार, कुछ भी सुनाई नहीं दे रही थी अब उसे, कुछ ऐसा तीव्र हो चला था उन्माद। वैसे भी, सुनता कैसे , आधा जानवर जो था ।…परन्तु अद्भुत शक्तियों से भरपूर था वह। हवा से भी तेज कहीं भी पहुंच जाता और चाहे जिसे मिनटों में पटक देता।
दुनिया में त्राहि-त्राहि मच गई पर मुश्किल यह थी कि उससे लड़ें तो लड़ें कैसे? दुश्मन मिस्टर इंडिया की तरह से पूरी तरह से अदृश्य था । न तो कोई उसे देख ही पा रहा था और न ही मार पा रहा था। जान-जाने के खतरे में दुनिया की सारी चहल-पहल खतम हो गई। आलम यह था कि आदमी तो डर के मारे घरों में बन्द हो चुके थे और जानवर सड़कों पर खुले घूमने को मजबूर थे। कोई उन्हें संभाल और खिला-पिला जो नहीं रहा था। पर जानवरों को भी यह सूनापन अच्छा नहीं लगा। चारो तरफ, हर वक्त , जंगल तक में बस आदमियों को ही देखते रहने की आदत जो पड़ चुकी थी उनकी। हारकर जानवरों ने एक मीटिंग बुलाई….
शेष अगले अंक में


बिल्लीजी नाराज हैं

एक कटोरा
भरा दूध का ,
बिल्ली अभी
छोड़कर आई |
बोली उसको
नहीं पियूंगी,
उसमें बिलकुल
नहीं मलाई |

कल का दूध
बहुत फीका था ,
शक्कर बिलकुल
नहीं पड़ी थी |
घर की मुखिया
दादी मां से,
इस कारण वह
खूब लड़ी थी |

दूध ,मलाई
वाला होगा ,
खूब पड़ी होगी
जब शक्कर|
और मनाएंगी
जब दादी,
दूध पियूंगी तब
उनके घर |

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