हास्य-व्यंग्यः मेरी आदर्श जीवन शैली- हरि जोशी

चिकित्सकों तथा अन्य अनुभवी मनीषियों का कथन है “ देश में अनावश्यक कारणों से लोग मरते हैं” |

सड़कों पर दुर्घटना से , विषैले तथा अस्वास्थ्यकर पदार्थ खाने से , प्रदूषित पानी पीने से ,सिगरेट तम्बाकू के सेवन से ,अथवा तेज़ ज़िंदगी जीने से|भला इन अध्ययन शील लोगों, विशेषज्ञों की बात नहीं मानेंगे तो समाज का और अपना भला कैसे कर पायेंगे ?इसीलिये इन दिनों खुद को स्वस्थ रखकर लम्बा जीवन जीने के लिए उन सबकी अनुशंसा के हिसाब से जीने लगा हूँ |

शुरू शुरू में मैंने चिकित्सकों के मतानुसार जीवन शैली बदली | सुबह , उठने से लेकर देर रात सोने तक उनके द्वारा बताया गया टाइम टेबल सामने रखा |चाय पीने से लेकर, दोपहर का भोजन, दवाई, सब कुछ नीयत समय पर लेने लगा |एक मिनिट भी इधर उधर नहीं किया |डॉक्टर कहते रहे शकर सफ़ेद ज़हर है |बिना खाए भी अन्य वस्तुओं से पर्याप्त मात्रा में मिलता रहता है |अतः इसे डायरेक्ट क्यों भकोसा जाये इसलिए खाना छोड़ दिया | चाय की पत्ती मिलावट वाली आ रही है |चाय पीना बंद कर दया |
एक रिपोर्ट में कहा गया कि कड़ा परिश्रम दिल की बीमारी के लिए आमंत्रण है ,इसीलिये मैंने लिखना पढ़ना छोड़कर सोना शुरू कर दिया | उस दिन पहली बार पत्नी ने मुझे मैगी खिलाई |दो तीन घंटे तक बेचैनी रही | संयोग से उसी दिन शाम को मैगी पर रिपोर्ट पढ़ ली कि कोई भी उसे न खाए , उसमें शरीर के लिए घातक तत्व मिले हुए हैं |मैंने पूरी ज़िम्मेदारी पत्नी पर डाली और ओढ़कर सो गया | निर्देश दे दिए “कोई भी वस्तु बनाने के पहले उसके बारे में अच्छी तरह जानकारी ले लिया करो तब बनाया करो |देख लो मैगी को यह रिपोर्ट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताती है ?” उस दिन से घर में मैगी की छुट्टी कर दी |

सेहत संबंधी पत्रिकाओं में पढ़ रखा था कि ब्रह्ममुहूर्त में घूमने जाने से स्वास्थ्य ठीक रहता है |एक दो बार गया भी| अँधेरे अँधेरे गया तो सड़कों पर स्वागत करने के लिए चाकूबाज़ और लुटेरों के झुण्ड खड़े देखे |हारकर सैर बंद कर दी |लोगों को उजाला होने तक भी चैन नहीं उसके पहले ही स्कूटर और कार सड़क पर लेकर दौड़ने लगते हैं |उनके द्वारा प्रसारित यह प्रदूषण चाकूबाज़ और लुटेरों से किसी तरह कम जानलेवा नहीं था |
तय किया अब मैं स्वयं स्कूटर क्या कार भी नहीं चलाऊंगा , पर्यावरण को क्यों दूषित करूं ?अब पैदल पैदल ही चलूँगा |पर सरकारी आंकड़े देखे तो पाया पैदल चलने वाले ही सबसे बड़ी संख्या में दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं ?इस तरह मैं छुई मुई की तरह सबके छुए जाने से बचता रहा |प्रदूषित हवा से मुक्त होने के लिए सड़क पर निकलना भी त्याग दिया |

चलो ,अब उस शैली में रहूँगा जिसे शासन चाहता है |कहाँ से शुरू करूं ? नाश्ते से शुरू करता हूँ | आटा कौन सा खाऊं?गरीबी में गीला न हो जाये ?रामदेव बाबा की चाय ठीक रहेगी ?पर उनकी चाय की पत्ती में हड्डी का चूरा मिलाने की बात उछालकर एक विदुषी ने शोध को नई ऊँचाइयाँ दे दी |इस सबसे डरकर कई दिन तक ,दो चार टमाटर , एक छोटा कच्चा खीरा खाकर जीवन यापन करता रहा| विशेषज्ञों ने तो यहाँ तक पता लगा लिया है कि स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए टमाटरों और लौकी में भी इंजेक्शन लगाये जाते हैं | ब्रेड में भी कालापन होता है याने ,वहां भी कार्बन |स्पष्ट है , कैंसर को आमन्त्रण देने वाले बहुमूल्य तत्व उसमें भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं | तब एक विशेषज्ञ ने फ़रमाया स्वस्थ बने रहने के लिए व्यक्ति को आर्गेनिक फल और सब्जियां खानी चाहिए | आर्गेनिक फल लेने गया तो दो संतरे, सौ रुपये में मिले |अरहर की या मूंग की दाल खाने की तो हिम्मत ही नहीं रही ? यदि जिंदा रहने के लिए इतना महंगा खाद्य पदार्थ मिलेगा तब तो वैसे ही मर जायेंगे ? हारकर बिसलरी या रेलनीर का महंगा पानी पीता रहा |

अब मैंने तय कर लिया है कि बिस्तर में पड़े पड़े सिर्फ पानी ही पीऊंगा| सब में तो मिलावट है ?पानी पी पी कर कोसते रहना क्या बुरा है ? |मुझे तो यही सबसे सुरक्षित जीवन शैली लगी |अब जीवन के शेष वर्ष शांति से गुज़र जायेंगे| इसलिए इन दिनों बिस्तर से उठकर सुबह सुबह मंजन करता हूँ , और पानी पीने के बाद पुनः बिस्तर में आकर सो जाता हूँ |कर्मठ जीवन जीने का शायद सर्वश्रेष्ठ तरीका यही है |कोई और तरीका हो तो मुझे बताएं ?

डॉ हरि जोशी
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