लेखनी/Lekhni-जुलाई-अगस्त-18

सोच और संस्कारों की सांझी धरोहर
Bridging The Gap

‘राम भटके बन-बन, लड़ाइयाँ लड़ीं
गांधी ने गोली खाई, ईसा भी सूली चढ़े
गौतम ने तजा घरद्वार तब जाकर बुद्ध बने
आज भी हल नहीं पर कोई उलझनों का
तेरा पता क्या है तू ही बता दे, ए शांति
तेरे लिए युगों-युगों से हम तरसे’
-शैल अग्रवाल

शांति की तलाश में…
(वर्ष 12 -अंक 116)

इस अंक मेंः अपनी बात। माह विशेषःगोरख पांडे, अदम गोंडवी, शैल अग्रवाल, कवि कुलवंत सिंह, विजय कुमार सप्पत्ति। कविता धरोहरः शंभुनाथ सिंह। दोहेः बीनू भटनागर। फुहारेंः लेखनी संकलन । मेरी पसंदः बालकवि बैरागी। माह की कवियत्रीः सरस्वति माथुर। गीत और ग़ज़लः लकी निमेष।

गद्य मेंः मंथन शांति की तलाश में-शैल अग्रवाल। परिचर्चाः मन की शांति-बीनू भटनागर। कहानी विशेषः अमिमन्यु की आत्महत्या-राजेन्द्र यादव। कहानी समकालीनः परछांइयाँ-शैल अग्रवाल। कहानी समकालीनः हे राम-सुशांत सुप्रिय। कहानी समकालीनः दस का नोट-मुरलीधर वैष्णव। कहानी समकालीनः मौसम का सफर- देवी नागरानी। दो लघुकताएँः आलोक कुमार सातपुते। अद्भुतः आँखों की दुनिया-गोवर्धन यादव। पर्यटनः एक पंथ दुइ काज-गोवर्धन यादव। परिदृश्यः दुबाई का विश्वग्राम-शिबेन कृश्ण रैना। चांद परियाँ और तितलीः चार बालगीतः प्रभुदयाल श्रीवास्तव।

In the English Section: My Column. Talk About Peace. Favourite Forever: William Shakespeare. Poetry Here & Now: Harihar Jha, Shail Agrawal. Story Contemporary: The Hearse- S. Sushant. Kids’ Corner: A jatak tale.

लेखनी के पाठकों के लिए आजाद भारत की 72 वीं वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई के साथ लेखनी लेकर आई है दो-दो सकलन-
‘देश हमारा’ और ‘वन्दे मातरम्’

परिकल्पना, संपादन व संचालनः शैल अग्रवाल
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