कहानी समकालीनः अपराधी-अर्जित मिश्रा

कबीर और नेहा का प्रेम विवाह हुआ था| कबीर मध्यम कद-काठी का एक आकर्षक युवक है और एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत है| नेहा भी खूब पढ़ी लिखी एक सुन्दर सी युवती है और शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में अंग्रेजी की शिक्षिका है| पति-पत्नी में परस्पर सम्पूर्ण विश्वास है जो कि किसी भी रिश्ते के पुष्पित-पल्लवित होने के लिए अनिवार्य हैं| हाँ कुछ वैचारिक मतभेद भी हैं जो कहाँ नहीं होते हैं|
कबीर अपने बाल्यकाल से ही सह-शिक्षा प्रदान करने वाले विद्यालयों में पढ़ा है अतः उसके मित्रों की सूची में पुरुष भी हैं और स्त्रियाँ भी| जैसा कि सर्वविदित है कि अभी भी हमारे देश के कई हिस्सों में स्त्री और पुरुष की मित्रता को अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता है| वैसे ऐसी दकियानूसी सोंच रखने वालों में पढ़े-लिखे और बड़े शहरों के लोग भी होते हैं|
कबीर की अधिकांश महिला मित्रों को नेहा भी जानती है, क्योंकि कबीर ये मानता है कि पति-पत्नी के बीच में कोई बात गुप्त नहीं होनी चाहिए, जो कभी किसी गलत समय पर गलत रूप में सामने आ जाये| चूँकि कबीर और नेहा पढ़े-लिखे होने के साथ ही खुले दिमाग के भी हैं, अतः उन्हें कभी एक दुसरे के मित्रों की जांच-पड़ताल करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ी|
एक दिन कबीर अपने कार्यालय में कुछ काम में व्यस्त था कि पास में टेबल पर रखे मोबाइल में मैसेज आने की घंटी बजी| अब आजकल तो हम लोग इतना आदत से मजबूर हैं कि कितना भी व्यस्त हों, मोबाइल पर मैसेज की घंटी बजने पर देखते जरुर हैं, और वैसे भी बीच-बीच में मोबाइल चेक करते रहते हैं, जैसे पता नहीं कौन सा महत्वपूर्ण कॉल या मैसेज आने वाला है| आदतन कबीर ने भी कंप्यूटर से मुंह हटाकर मोबाइल चेक करा| फेसबुक के मैसेंजर पर एक मैसज आया था| कबीर ने भेजने वाले का नाम देखा –“प्रतिमा अवस्थी”| कबीर के मित्रों की सूची में ये नाम नहीं था, उसने मैसेज खोला तो उसमे सिर्फ ‘हेलो’ लिखा था| प्रोफाइल पर लगी फोटो को देखकर कबीर ने पहचाना की ये प्रतिमा अवस्थी तो उसकी पत्नी नेहा की सहकर्मी एवं घनिष्ट मित्र हैं| कबीर ने कई बार नेहा से उनका नाम सुना था और नेहा के साथ में उनकी फोटो भी देखी थी| पहचान सुनिश्चित हो चुकी थी, किन्तु कबीर ये सोंच रहा था कि कहीं गलती से ये मैसेज तो नहीं आ गया| भाई जिस स्त्री से वो कभी मिला नही, कभी कोई बात नहीं हुई, वो अचानक फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने के बजाय मैसेंजर पर मैसज क्यूँ करेगी| खैर मैसेज का जवाब देने में तो कोई बुराई थी नहीं, सो कबीर ने भी जवाब में ‘हेलो मैडम’ टाइप कर भेज दिया| शाम को घर पहुँचने पर अपनी आदतानुसार कबीर ने नेहा को बताया- “यार आज तुम्हारी फ्रेंड प्रतिमा का मैसेज आया था मेरे पास| एक पल के लिए तो अपने पति के लिए पानी का गिलास हाथ में लिए नेहा रुकी, फिर सामान्य होकर बोली-क्यों, उसने क्यों किया| कबीर ने जवाब दिया-अब मुझे क्या पता, ये तुम पूछ लो उससे, आखिर फ्रेंड है तुम्हारी|
कुछ दिन बाद एक बार प्रतिमा और कबीर में चैटिंग भी हुई, जिसमे सामान्य दोस्तों वाली बातें हुई- आदतें, फ़िल्में. क्रिकेट आदि तभी प्रतिमा ने कुछ ऐसा कहा जिसकी कबीर को बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी-“आप बुरा मत मानियेगा, लेकिन आपकी और नेहा की जोड़ी बिलकुल अच्छी नही है, आपको तो इससे बेहतर बीवी मिलनी चाहिए थी”| कबीर कुछ झुंझलाया लेकिन वो एक समझदार युवक था, साथ ही उसके संस्कारों ने उसे एक महिला से गरिमामयी तरीके से बात करने को बाध्य कर रखा था, सो उसने बात को पलट दिया| कुछ समय पश्चात चैटिंग बंद हो गयी| कबीर के अन्दर भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा था, किसी ने उससे ही उसकी पत्नी के लिए गलत बोला था और वो कुछ कर नहीं पाया था| कुछ देर में अपने को सँभालने के बाद कबीर ने निश्चय किया कि वो ये बात किसी को कभी नहीं बताएगा, नेहा को भी नहीं, क्योंकि नेहा को ये जानकर बहुत दुःख होगा, कि उसकी मित्र उसके बारे में क्या सोंचती है| हालाँकि कबीर कभी नेहा से झूठ नहीं बोलता था, किन्तु इस समय सत्य बोलने से नेहा को दुःख पहुँचता जो कबीर कभी नहीं चाहता| हमारे शास्त्र भी कहते हैं कि जो सत्य किसी को तकलीफ पहुंचाए वो भी पाप के समान है अतः ऐसी परिस्थिति में मौन ही सबसे अच्छा विकल्प है| यही सब सोंचते हुए कबीर घर पहुंचा| शाम की चाय के साथ ही नेहा ने अचानक ही पूछ लिया-“ प्रतिमा का कोई मैसेज तो नहीं आया था दुबारा”| कहते हैं स्त्रियों की छठी इन्द्रिय बहुत तेज होती है| अचानक किये गए इस प्रश्न से कबीर अन्दर तक हिल गया, ऐसा क्यूँ पूछा, कुछ पता तो नहीं चल गया| लेकिन जैसा निर्णय पहले ही ले चुका था कि नेहा को इस सब से दूर रखना है, उसने बोला- “नहीं| क्यूँ पूछ रही हो”| नेहा ने कहा –“ऐसे ही, और मुझे कोई चिंता नहीं है क्योंकि अगर ऐसा कुछ होगा तो मेघा मुझे बता देगी”|
मेघा भी नेहा व प्रतिमा की सहकर्मी है और नेहा की सबसे अच्छी मित्र भी| मेघा से कबीर एक दो बार नेहा के साथ मिल चुका था, और उसकी बहुत इज्जत करता था| कभी कोई बात हो रही होती थी पति-पत्नी में तो कबीर हमेशा कहता था कि मेघा को तो वह आदर्श नारी मानता है|नेहा भी मेघा की तारीफ करती नहीं थकती थी|
कबीर का माथा ठनका कि अभी तो मेघा भी है बीच में| लेकिन वह पूर्ण आश्वस्त था कि यदि प्रतिमा ने मेघा को बता भी दिया तो मेघा नेहा को बताने कि इतनी बड़ी बेवकूफी कभी नहीं करेगी| आखिर मेघा एक पढ़ी-लिखी, संभ्रांत एवं समझदार महिला जो है| लेकिन कबीर का ये अनुमान गलत था|
एक शाम दफ्तर से कबीर जब घर पहुंचा, तो घर में शीत-युद्ध सा वातावरण था, जो कभी भी तृतीय विश्वयुद्ध में बदल सकता था, हुआ भी वही जो होना था, नेहा ने सीधा सवाल क्या- “तुमने प्रतिमा को मैसेज किया”| कबीर ने वही बोला-“नहीं, अब क्या हुआ”| नेहा ने गुस्से से लाल-पीले होते हुए कहा-“ मेघा का फ़ोन आया था, उसने बोला की मैं तुम्हारी सच्ची मित्र हूँ इसलिए बता रही हूँ कि प्रतिमा का तुम्हारे पति के साथ चक्कर चल रहा है|” कबीर को काटो तो खून नहीं, मुंह में जबान का कोई फायदा ही नहीं जब बोलने का सामर्थ्य आप खो चुके हों| कबीर चुपचाप सुनता रहा| नेहा ने आगे कहा-“ मेघा ने बोला कि तुम्हारा पति बहुत ख़राब है, वो प्रतिमा के साथ मूवी देखने जाता है, प्रतिमा उससे तुम्हारी बुराई करती है वो भी सुन लेता है,..इत्यादि”| कुछ सँभलते हुए कबीर ने हारी हुई जंग को जीतने का अंतिम प्रयास किया- यार, तुम्हे बताया तो था कि उसका मैसेज आया था”| नेहा ने तमतमाते हुए कहा-“झूठ मत बोलो, मेघा ने खुद मैसेज देखा है| कबीर ने एक उम्मीद की किरण जलाई-“ हो सकता है, कि मेघा को कोई ग़लतफ़हमी हुई हो”| अब ये तो सबको पता है कि ऐसे वक़्त में सिर्फ तूफान के गुजर जाने का इंतजार किया जाता है| कबीर के पास और कोई चारा भी नहीं था|
अगले दिन ऑफिस में कबीर बहुत दुखी था, साथियों के पूछने पर उसने सारा किस्सा सुनाया कि कैसे बिना बात के घर में बवंडर मच गया| कबीर के दोस्त सुनील ने कहा-“ भाई, ये मेघा पागल है क्या, कोई भी महिला किसी दुसरे का घर क्यों उजाड़ना चाहेगी| तभी दीपक बोला- ऐसा नहीं है भाई, मुझे लगता है, मेघा तुम्हारे प्रति आकर्षित है, इसलिए प्रतिमा का तुमसे बात करना उसे अच्छा नहीं लगा, प्रतिमा को लाइन से हटाने के लिए उसने भाभी को सब बता दिया-नमक मिर्च लगाकर|” सभी ने इस बात का एक स्वर में समर्थन किया| कबीर को भी ये बात जंची, घर पहुंचकर उसने नेहा को ऑफिस में हुई बातें बतायीं| कबीर ने कहा कि मेघा और प्रतिमा दोनों ही से अधिक संपर्क रखना अब ठीक नहीं है क्योंकि कौन गलत है और कौन सही ये बता पाना मुश्किल है| नेहा को भी कुछ शायद समझ में आया| अब कुछ समझ आया या नहीं ये ब्रह्मा नहीं बता सकते तो कबीर तो महज एक इन्सान है|
कुछ दिन बाद ऑफिस से लौटते समय कबीर ने नेहा को फोन किया| लगभग सभी लोग ऑफिस से लौटते समय घर फ़ोन करके पूछ लेते हैं कि कुछ लाना तो नहीं है, वरना वापस दौड़ना पड़ेगा| नेहा ने बताया कि मेघा आई थी, अभी जा रही है| कबीर के तो तोते उड़ गए-“ अब कहीं जाकर सब ठीक होने लगा था, अब ये औरत क्या नया बवाल करने आई थी, मेरी तो जान ले कर ही मानेगी, आखिर क्या मिलता है ऐसे लोगों को किसी के घर में आग लगाकर,पूरी बात पता नहीं आधी अधूरी जानकारी लेकर निकल पड़ते हैं मित्रता निभाने, कसम से कोई पुरुष होता तो टाँगे तोड़ देता है, लेकिन महिला है कर भी क्या सकते हैं, …अपना घर बचाओ.. बाकि सबका न्याय ईश्वर करेंगे”|
डरते-डरते कबीर ने घर की घंटी बजायी| घर का माहौल एकदम शांत जैसे कुछ हुआ ही ना हो| नेहा उस बारे में कोई बात ही नहीं कर रही| हाँ कुछ अधिक ही खुश और सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी, कबीर उसके अन्दर छुपे हुए दर्द को महसूस कर रहा था| आख़िरकार उसने पूछ ही लिया- “मेघा क्यूँ आई थी”| नेहा उस समय कुछ और बात बता रही थी, बीच में रूककर बहुत ही सामान्य तरीके से बोली-“तुम्हारी और प्रतिमा की चैटिंग का स्क्रीनशॉट दिखाने आई थी, कोई बात नहीं|” इतना कहकर वो वापस अपनी बात पूरी करने लगी| कबीर को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, उसकी तो दुनिया ही लुट चुकी थी, जिस पत्नी से वो बेपनाह मुहब्बत करता था, आज वो उससे आँखें नहीं मिला पा रहा था, प्रेम और विश्वास के संसार में वो अपराधी जो साबित हो गया था…
अर्जित मिश्रा
सीतापुर
9473808236