लेखनी-अगस्त-सितंबर-2014

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~ लौटना ~

अंक 88 वर्ष 8

“लौटेगा तुम तक ही बारबार इस पार कभी उस पार कभी
लहरों पर हो-हो सवार तूफानों से जूझ कभी
पानी का ये बुदबुदा प्यासा तो कमजोर नहीं…”
-शैल अग्रवाल

 

इस अंक के कविः कविता धरोहरः रूमीः अनुवाद  देवी नागरानी। कविता आज और अभीः गीत और ग़ज़लः बशीर बद्र, मंजरी पाण्डेय।  माह विशेषः शैल अग्रवाल, ध्रुव गुप्त , मधुरिमा, चन्द्रकान्ता देवताले , शबनम शर्मा, सरस्वती माथुर। माह के कविः यतीन्द्र मिश्र।

 

रचनाकारः कविता में इन दिनोः ओम निश्चल, मंथनः डॉ. विजय शिंदे।  माह विशेषः गोवर्धन यादव। कहानी समकालीनः शैल अग्रवाल। कहानी समकालीनः पद्मा मिश्रा। धारावाहिकः मिट्टीः शैल अग्रवाल ।  दो लघुकथाएः प्राण शर्मा, सुधा भार्गव। समीक्षाः सुनील जाधव। संयुद्धवीर लाम्बा। स्मरणः हरिहर झा। परिचर्चाः युद्धवीर लाम्बा। मुद्दाः वेद मित्र। हास्यव्यंग्यः सुशांत सुप्रिय। चांद परियाँ और तितलीः शैल अग्रवाल।

 

In the English section: Poetry Here & Now: Unni Krishnan, Shail Agrawal. Favourites Forever: William Shakespeare. Story Classic: Maxim Gorky. Face to face: Basudev Adhikari with Durgalal Shrestha. Kids’ Corner: A Traditional Chinese Folk lore.

 

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