माह विशेष-हायकूः डॉ. रमा द्विवेदी/ अक्तूबर-नवंबर 2015

 

दीपावली’ पर   हाइकु 

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1 –
अँधेरी रात
अकेला है जलता
माटी का  दिया ।
2 –
उजालों में भी
पलते  हैं अँधेरे
दीपक तले  ।
3 –
रंगोली सजी
हर देहरी द्वार
दीपों के साथ ।
4 –
स्नेह का दीप
खुशियों से भरता
घर -आँगन ।
5 –
जिस घर में
नारी का हो सम्मान
लक्ष्मी का वास ।
6 –
लक्ष्मी की पूजा
करता   दरिद्र भी
लक्ष्मी न आएं ।
7 –
घर – महल
उजास ही उजास
दीवाली रात ।
8 –
झोपड़ी -दीप
जला  है रात भर
तम न छँटा।
9-
कभी न बुझे
आशा का दीप जले
 अँधेरे पिए ।
10 –
अँधेरी रात
 ढिबरी का प्रकाश
  जलती रूह ।
11 –
उजाले देता
मुफलिसी में जीता
अँधेरे पीता ।
12 –
बिकती कला
कौड़ियों के भाव में
मिट्टी  के दीये ।
13 –
दीये गढ़ता
प्रकाश भरने को
कुम्हार हूँ मैं ।
14 –
दिया व बाती
 संग -संग जलते
  प्रीत निभाते ।
15 –
दीप  लघु हूँ
 अंधेरो  को पीता हूँ
तन्हा  जीता हूँ ।
डॉ रमा द्विवेदी

1 Comment on माह विशेष-हायकूः डॉ. रमा द्विवेदी/ अक्तूबर-नवंबर 2015

  1. `लेखनी ‘का अक्टूबर अंक अपने प्रभुत्व और गरिमा के साथ आ चुका है ,,,,शैल जी को अनेकानेक बधाइयां एवं विजय पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं । इस अंक में मेरे हाइकुओं को भी शैल जी ने स्थान दिया है ,,,दिल से शुक्रिया शैल जी का!

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