चांद परियाँ और तितलीः सरस्वती माथुर दिसंबर/ जनवरी 2015

“सांता आया !”

“क्रिसमस का उपहार लाया !”
 
क्रिसमस आया 
बच्चों के लिए
 कुछ सपने लाया
मुखरित आशाएँ
 उनमें जागी
घोर निराशायेँ 
मन से भागीं 
मासूम आँखों ने 
खोली जब
 नैन की  खिड़कियाँ तो
 ख्वाबों के रंगीन
 खेल खिलौने देखे 
उम्मीद के 
उड़नखटोले देखे 
होंसले उड़ने के
सुनहरे देखे
 शरद ऋतु पर
 तितली से उडते 
सांता क्लाज  के 
  परिंदे देखे
 इंद्रधनुषी रंगों से
शुभप्रभात की रात को 
 झिंगल बैल की
घंटी बजाता जब
सांता लेकर  आया
मेरी  क्रिसमस  का 
सुंदर उपहार  
इस घड़ी में
बच्चे विभोर हो बोले
हमें बहुत है
 इस पर्व से प्यार
 हमें है स्वीकार
 प्रीत प्रेम की
 यह मनुहार !
 
“बड़ा दिन आया !”
 {क्रिसमस पर्व }
1

यीशू सन्देश
 क्रिसमस ट्री पर
 स्वर्ण मोती से l
2
 स्वागत करें
 सांता क्लाज़ संत का
 पाहुन है वो l
3
 मन हर्षाया
 बच्चों के स्वप्न लेके
सांता जो आया l
4
बड़ा दिन है
 नई सौगात लाया
बच्चों को भाया l
5
साँता क्लाज जी
घूम घूम करके
स्वप्न हैं बाँटें l
6
 धूम मचाये
 क्रिसमस जो आये
बच्चे मुस्काए 
7
बच्चे थे जागे
जिंगल बैल- घंटी
सुन कर भागे l
8
खेल खिलौने
स्नेह की मनुहार
सांता का प्यार l
9
नए सपने
है लेके  सांता   आया
बच्चों को भाया l
10
झोलों में भरे
रंगीन उपहार
 बच्चे  तैयार l
डॉ सरस्वती माथुर

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