चन्द हायकूः देश हमारा

मन हर्षाया
पंद्रह अगस्त पे
तिरंगा छाया

राष्ट्रीय पर्व
प्रतीक आजादी का
मांगता शान्ति

दे कुर्बानी
नींव रखी देश की
किया आजाद

कोंपल खिला
आजादी का देश में
बीज त्याग का

आजादी मिली
लाल रंग में भीगा
कफ़न ओढ़

कोंपल खिला
आजादी का देश में
त्याग था बीज

त्याग का पथ
शहीदों ने चुना था
नमन उन्हें

देश बचाया
वीरों ने हो कुर्बान
थे वो महान

शीश न झुका
शहीदों का कभी भी
हुए कुर्बान

शीश झुकाऊँ
राष्ट्रीय पर्व पर
चढाऊँ पुष्प

डॉ सरस्वती माथुर
***

मन उमगे
तन ये लहराए
शीश नवाए

दिग दिगंत
सुरभित मलय
रश्मि प्रखर

तत्पर रहे
देश के हित में
जो आजीवन

देश उन्हें तू
कर ले स्मरण
कर वंदन।

स्वप्न देखूँ
हुलस हुलस के
देश के हित

तिरंगा जब
आकाश लहराए
संदेश ले लूँ

दूर नहीं है
हमसे कभी यह
मां का आंचल

आवाहन है
यही जुड़े रहने का
प्राण-प्रण से

संकल्प लेवें
और आहुति देवें
तन मन से


एक हैं हम
एक देश फिर भी
खंडित क्यों?
शैल अग्रवाल

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